रक्षा का बंधन

                
                                                             
                            प्रेम समर्पण का ये त्यौहार पुरातन
                                                                     
                            
निभाओ रक्षा का बंधन, सभी जन।

तप से पाया था इन्द्राणी ने रक्षा का धागा
इंद्र की रक्षा हेतु बाँधा था वो "रक्षा धागा"
कर्णावती ने भेजी थी राखी वीर हुमायूँ को
मांगी थी रक्षा ,बाँध कर ये अटूट बंधन
मन्नतों दुआओं का ये त्यौहार पुरातन
निभाओ रक्षा का बंधन,सभी जन।

पावन मधुरिम रिश्ता है ये भाई बहन
कलाई मे बांध भाई के स्नेह बंधन,बहन
बांधती है अरमान, बोले ये मंगलवचन
खुशियों से भरा रहे सदा तुम्हारा जीवन
हर बहन की रक्षा का तुम मुझको दो वचन
निभाओ रक्षा का बंधन,सभी जन।

भाई आज हालात पर दिल करता क्रंदन
प्यार के संग आ गया व्यापार और धन
बीच में आ बैठ जाता है झूठा अहम
धूमिल दूषित हो रही इसकी पहचान
मायने खो रहा ये पवित्र रक्षा बंधन
निभाओ रक्षा का बंधन सभी जन।

फरियाद करती समाज से अब ये बहन
ऐसी अनमोल राखी बना के मुझे दे दो
जो सजाती रहे हर भाई की कलाई
सलामत रहे सरहद पर हर सिपाही भाई।
हर बहन भाई सुरक्षित हो यहाँ
चारों तरफ खुशियां ही खुशियां हो छाई।

भाई बोला प्रेम से ,देख बहन का रुदन
जाति धर्म से नही बंधा ये धागा ,बहन
वीरांगनाओं की धरती है ये वतन
शौर्य ,कर्तव्य त्याग का यहाँ अनोखा बंधन
उल्लसित हो हम सब मनाएंगे रक्षाबन्धन
निभाएंगे रक्षा का बंधन ,सभी जन।

प्रेम समर्पण का ये त्यौहार पुरातन
निभाओ रक्षा का बंधन सभी जन।

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3 years ago

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