अब याद आता है

                
                                                             
                            अब याद आता है......
                                                                     
                            

अब याद आता है, उसका मुस्कुराना;
उसका बात बात पर मुझे परेशान करना
अब याद आता है।

बात बात पर बात करने का बहाना ढूंढना,
अब याद आता है।

कभी मेरी गलती पर तो कभी खुद की गलती पर भी उसका मुझे मार देना,
अब याद आता है।

यूं तो मुझे भी ज्यादा गुस्सा आता है पर बेवजह हंसते हुए उससे मार खा लेना.....
अब याद आता है।

छोटी सी बात पर भी उसका गुस्सा जाना,
अब याद आता है।

कभी उसका मुझे मनाना तो कभी मेरा उसे मनाना....
अब याद आता है।

अब तो वक्त बदल गया....पर अब भी वो वैसे ही याद आता है

और उसका मुस्कुराना अब भी याद आता है।
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
3 weeks ago
Comments
X