हास्य कविता

                
                                                             
                            टूटी फूटी अंग्रेजी सीख शहर से
                                                                     
                            
लौट गांव और जनाब वोले अंग्रेजी पहले पहर से
पत्नी आई पास
थी थोड़ी उदास
वोली वहुत दिन वाद आये
वहुत याद आये
जनाब ने दिखाया रौब
आव देखा न ताव
वोले जाओ और बनाओ टू कप टी
अनपढ़ पत्नी ने अर्थ का अनर्थ कर दिया
पूरा घर अपने सिर उठा लिया
वोली हम बड़ी अड़ैल
हमरो बप गांव पटैल
झल्लाई , चिल्लाई और झपटी
वोली तुम कपटी और तुमरो बाप कपटी
बात बताई पूरी अपनी सास को
बोली सास नशा ऐसा ही चढ़ा था इसके बाप को
फिर झरिया तपाई
अंग्रेजी भुलाई
सुन सव बात
याद आ गई औकात
वोले मुन्ना की बाई
तुमने चाय नहीं पिलाई
वे मुस्कुराई , थोड़ी शरमाई
वोली इतने दिन से काय नहीं बताई

( शब्द : अशोक शर्मा )
 
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3 weeks ago
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