राखी का त्यौहार आया है

                
                                                             
                            स्नेह की डोर लिए राखी का त्यौहार आया है
                                                                     
                            
थाल आशीष भरी मंगलमयी प्यार लाया है।
रोली-अक्षत-मीठी आरती उतारूँ मेरे भाई
बाँध राखी अक्षय हो सुःख तेरा माँगू मेरे भाई
किसी को गा के सुनाऊँ किसी को बाग में घुमांऊँ
मुस्कुराती हुई यादों का संसार लिए आया है
स्नेह की डोर लिए राखी का त्यौहार आया है
कभी आँखों में नमी बन आ जाते हो
कभी बचपन की यादों में खिलखिलाते हो
चाकलेट पेड़ों में नहीं लगते पागल है तुमको बताना
दूर रह कर आँखों से छलक जाए वो प्यार लाया है
स्नेह की डोर लिए राखी का त्यौहार आया है
उम्र लेकर मेरी जियो खुश रहना मेरे भाई
तुम जो हो दोस्त मेरे मुझे तुमसे कहना मेरे भाई
भुला न देना मुझे मेरा बचपन वहाँ बीता
मेरे हाथों में तेरा हाथ फिर इक बार लाया है
स्नेह की डोर लिए राखी का त्यौहार आया है
थाल आशीष भरी मंगलमयी प्यार लाया है ।

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3 years ago

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