पिता

                
                                                             
                            इक पेड़ है पिता जो धूप में अड़ा है..
                                                                     
                            
दिन रात के मिटाकर फासले खड़ा है..
छत्र छाया में पले बढ़े नवांकुरों को,
बचाने आंधियों से अकेला लड़ा है..

-सागर तन्हा

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3 years ago

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