ये सावन याद दिला ता है क्यूँ मुझे पहला प्यार

                
                                                             
                            ये सावन याद दिला ता है क्यूँ मुझे पहला प्यार।
                                                                     
                            
अंजान एक नारी भड़काती दिल में चिंगारी ।
अंजान मोड़ तीरछी डगर पर ना जाने मुझे क्यों नीहारे ।
सहमी सहमी सी डरी डरी सी सुंदर भोली वह गोरे सुरत वाली।
वह कुछ ना बोली बस आंखों से ही मुझ पर डोरे डालीं।
आंखों के इशारों से प्यार भरें मुझ पर बस वह तीर जो छोड़े।
उसका यौवन था सारा भीगी जुल्फों से उतरे सावन के पानी की धार।
ये सावन याद दिला ता है क्यूँ मुझे पहला प्यार।
 
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1 month ago

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