विज्ञापन

ये एहसास अलौकिक है

                
                                                                                 
                            यह एहसास अलौकिक है
                                                                                                

कुछ दिव्य सा
जब मैंने तुम्हें माखन खिलाई
वो खुशी बेशब्द है

अंदर खुशी दौड़ गई
प्रेम जाग गया
तेरी मोहती मूरत से
मैं प्रेम से भर गई

जब मैंने तुम्हें माखन खिलाया
तो मन ने कहा बार-बार खिलाउ ,
और माखन लगी प्रतिमा को देखती जाउ ।

तेरी प्रतिमा जब इतना मोहती हैं
तो तुम सच मे कितना मोहता होगा।
ये एहसास हुआ मुझे
जो तेरी मुरत को प्रेम से है देखता
तू उसी क्षण उसे प्रेम से है भरता।

गोपिया तुझे देखकर सब इसलिए थी बिसराती
क्योंकि है परमात्मा
तुझसे सुंदर इस दुनिया में कुछ है ही नहीं स्थित।

तेरी प्रतिमा से जो प्रेम है उमड़ता
उसकी नहीं है कोई सीमा,
बस देरी है तो प्रेम से देखने की
जिसने देखा उसका वह छन जिंदगी की सबसे है कीमती।

गिरिडीह( झारखंड)
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X