जनाक्रोश

                
                                                             
                            का हुइगा है दुश्मन की नज़रिया मा ।
                                                                     
                            
आगि लागे पाकिस्तान की नगरिया मा ।।
अपने वहाँ वहमी आतंकी बिठावति है।
उनका जुलम हमरे देश से छिपावति है ।।
हमला करवाति है चलती डगरिया मा ।
आगि लागे पाकिस्तान की नगरिया मा ।।
भूलि गया तू हमही से बना है ।
हमरे ही आगे सीना तानि के खड़ा है ।।
इज्ज़ति जाएगी बीच बजरिया मा ।
आगि लागे पाकिस्तान की नगरिया मा।।
सैनिकन का हमरे तूने मारिकर गिराये है ।
छोटे बच्चोंको तूने यतीम बनाए है।।
विधवा हुई है जो बाली उमरिया मा ।
आगि लागे पाकिस्तान की नगरिया मा।।
अब अइसन मार तू हमसे झेलेगा ।
दुबारा ऐसा खेल नहीं खेलेगा ।।
दाग लगि जायेगा तोहरी उमरिया मा।
आगि लागे पाकिस्तान की नगरिया मा ।।

नीरज यादव (खिचडी सम्राट)
सीतापुर उत्तर प्रदेश
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X