एक नयी असर

Ek nayi asar
                
                                                             
                            तुम जो मुझे छूकर गयी हो
                                                                     
                            
पूरा विचारों को
एक नयी असर दे गयी हो
कुछ मेरा विकार दूर कर
वो एक नयी संस्कार दे गयी हो
हां तुम जो मुझे यूं छूकर गयी हो "

-HeeraSahu
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
3 weeks ago
Comments
X