दिल ये खाली है

                
                                                             
                            है चारों ओर शोर मगर दिल ये खाली है,
                                                                     
                            
तपते सूरज की रोशनी भी आज काली है।

जिन्होंने हमेशा ठुकराया आज वही हाल पूछ रहे है,
लगता है किस्मत फिर कोई बड़ा खेल खेलने वाली है।

खुद में होकर भी आज खुद से बहुत दूर हूंँ,
जाने अब तक अपनी जिंदगी मैंने कैसे संँभाली है।

सुलझाया जितना उससे ज्यादा सब उलझ गया,
हाथों की लकीरों ने फिर जिंदगी पलट डाली है।

फूल सी राहें कांटो से अधिक चुभी है,
सब कुछ इस क्षण मात्र एक दर्द की प्याली है।।
- तुलसी गर्ग
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X