क्यों ये रात ढलती नहीं...

                
                                                             
                            क्यों ये रात ढलती नहीं
                                                                     
                            

कितनी कि कोशिशों का इंतज़ार
लेकिन परिणामों की रात क्यूं ढलती नहीं

लंबी कतार में खड़ी बैठी हूं
लेकिन मेरा मुकाम का चांद क्यूं खिलता नहीं

कहीं दिनों तक बेड़ियां लेके चल रही
मुझे पैगाम सुनाने वाली रात क्यूं ढलती नहीं

लिखती ही रही हर पल मेरा संदेश
वो अश्रु को पोछने वाली दमदार रात क्यूं ढलती नहीं

में बैठी रहूंगी एक कोने में करती इंतज़ार
दुख भरे दिल में मरहम भरने वाली रात क्यूं ढलती नहीं
 
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3 weeks ago
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