जब कालिया जी से कहा पत्नी को 'हार्ट अटैक' हो गया है और सौ रुपए तुरंत चाहिए

ravindra kalia
                
                                                             
                            छुट्टी के एक दिन दोपहर को किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैं शहर में नया-नया आया था किसी की प्रतीक्षा भी न थी। ऊपर से झाँक कर देखा, हिंदी के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बुजुर्ग रचनाकार दरवाजा पीट रहे थे। मैं भाग कर नीचे पहुँचा, उन्हें दफ्तर में बैठाया। आदर सत्कार क्या करता, घर में चाय बनाने की भी सुविधा न थी और सर्वेश्वर के शब्दों में कहूँ तो जीवन 'खाली जेबें, पागल कुत्ते और बासी कविताएँ' था। 
                                                                     
                            

खाने पीने की व्यवस्था अश्क जी के यहाँ थी, इसलिए निश्चिंत था। मुझसे अश्क जी की एक ही अपेक्षा थी कि वे दिन भर जितना लिखें, मैं शाम को सुन लूँ। शुरू में तो यह बहुत सम्मानजनक लगता था कि एक अत्यंत वरिष्ठ लेखक मुझे इस लायक समझ रहा है कि मैं उनकी रचना पर कोई राय दे सकूँ। मगर कुछ दिनों बाद मैं इससे ऊबने लगा।

'आज बहुत मुसीबत में तुम्हारे पास आया हूँ।' उन बुजुर्ग रचनाकार ने बताया कि उनकी पत्नी को 'हार्ट अटैक' हो गया है और उन्हें किसी भी तरह सौ रुपए तुरंत चाहिए।' आगे पढ़ें

1 month ago

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