जिनसे झगड़ा था उनके प्रति भी कालिया के किसी संस्मरण में कोई कटुता नहीं है: दूधनाथ सिंह 

जिनसे झगड़ा था उनके प्रति भी कालिया के किसी संस्मरण में कोई कटुता नहीं है: दूधनाथ सिंह।
                
                                                             
                            रवीन्द्र कालिया और दूधनाथ सिंह हिंदी के बड़े कथाकार और लेखक थे। आज दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन वे अपने उनकी कहानियां, उनके संस्मरण आज भी हमारे बीच हैं जिसे हम हमेशा पढ़ते रहेंगे और इस तरह वे अपने पाठकों की समृतियों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे। रवीन्द्र कालिया के निधन के बाद दूधनाथ सिंह ने यह संस्मरण लिखा था। 
                                                                     
                            

रवींद्र कालिया से मेरी पहली भेंट सन 1963 में इलाहाबाद में हुई थी। परिमल के लोगों ने एक कहानी गोष्ठी की थी। उसमें कालिया और गंगा प्रसाद विमल दोनों आए थे। तब मैं करैलाबाग के एक कमरे वाले किराए के मकान में अकेले ही रहता था। दोनों मेरे घर पर ही रुके। हम लोगों ने एक-एक, दो-दो कहानियाँ तब लिखी थीं। हममें से किसी का भी कोई कहानी संग्रह तब तक नहीं छपा था।

सन 1965 में कालिया से दूसरी भेंट मॉडल टाउन में ममता से उसके विवाह के अवसर पर हुई। मेरी गोद में मेरा पहला बच्चा था। ममता और कालिया दूल्हे-दुल्हन के रूप में सजे-बजे साथ-साथ बैठे थे। मेज और कुर्सियों की एक लंबी कतार थी जिस पर दिल्ली के और दूसरी जगहों से आए हुए लेखक बैठे हुए थे। बधाई देने के लिए मोहन राकेश मुझे बाँह से पकड़कर कालिया के पास ले गए। तब तक नई कहानियाँ के माध्यम से हमारी पीढ़ी हड़कंप मचा चुकी थी। आगे पढ़ें

1 week ago

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