मसीहा पर विश्वास है, तो दूसरों की मसीही क्षमता पर भरोसा करें

एंथोनी बर्गेस
                
                                                             
                            जब मैंने पहला उपन्यास लिखना शुरू किया, तो मुझे नहीं लगता था कि मैं एक कॉमिक लेखक हूं। मैं स्वयं को एक गंभीर लेखक मानता था। लेकिन जब मैंने पहला उपन्यास लिखा, तो उसे हास्यपूर्ण उपन्यास माना गया। मैंने हमेशा काफी सावधानीपूर्वक लिखा है और यहां तक कि बहुत धीमी गति से।
                                                                     
                            

मैं दिन में कुछ ही घंटे लिखने पर खर्च करता हूं। जहां तक संकेत या संदर्भों की बात है, तो उसकी जड़ें परंपरा में हैं। किसी पुस्तक के पीछे  अन्य किताबें भी होती हैं, जो लिखी गई हैं। लेखक को इसकी जानकारी होती है और पाठकों को भी इसके बारे में जागरूक होना चाहिए। मैं अक्सर सुबह के समय लिखता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि लेखन के लिए दोपहर का समय अच्छा होता है, क्योंकि दोपहर में ज्यादातर लोग सोए रहते हैं।

अगर दोपहर में मेरा लंच हल्का हो, तो दोपहर के समय लिखना मुझे अच्छा लगता है। यह ऐसा समय होता है, जब शरीर न तो बहुत सक्रिय होता है और न ही सबसे ज्यादा ग्रहणशील। लेकिन दोपहर के समय दिमाग बहुत सक्रिय होता है। मुझे यह भी लगता है कि दोपहर के समय अवचेतन मन ज्यादा सक्रिय होता है।

सुबह चेतना या जागरूकता का समय होता है, लेकिन दोपहर का समय चैतन्यता के आंतरिक इलाके में झांकने का समय होता है। मुझे ऐेसे कथानक पर काम करना पसंद है, जो व्यापक अपील कर सकता है। हर लेखक अपना विशेष पाठक वर्ग तैयार करना चाहता है। अगर आप अनदेखे मसीहा पर विश्वास करते हैं, तो आपको दूसरों की अनदेखी मसीही क्षमता पर भी विश्वास करना चाहिए।

 एंथोनी बर्गेस, मशहूर ब्रिटिश उपन्यासकार
 
1 month ago

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