शमशेर की प्रेम कविताएं तो मशहूर हुईं ही, उनकी शायरी भी कम महत्वपूर्ण नहीं: राकेश मिश्र

शमशेर की प्रेम कविताएं तो मशहूर हुईं ही, उनकी शायरी भी कम महत्वपूर्ण नहीं... 
                
                                                             
                            'नई कविता' में मुक्तिबोध के साथ समान रूप से आदरणीय और चर्चित कवि शमशेर बहादुर सिंह की पहचान यूं तो एक समर्थ और महत्वपूर्ण कवि की है, लेकिन उनकी लिखी ग़ज़लें, रुबाइयाँ, क़ते और अशआर भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं । 
                                                                     
                            

शमशेर की शायरी का रंग, उसकी तड़प और उसकी अभिव्यक्ति दरअसल साझा संस्कृति में उनकी जबरदस्त आस्था से उपजी थी। हिंदी और उर्दू को लेकर जो राजनीति उस समय की जा रही थी, शमशेर उससे गहरे आहत थे। उनका स्पष्ट मानना था कि ‘जो संस्कार मुझे अपने पूर्वजों से मिले, उनमें कम से कम उर्दू-हिंदी के बीच की दीवारें नहीं थी; बल्कि उनके बीच एक ऐसी जमीन थी जहाँ दोनों लगभग एक नज़र आती हैं।  आगे पढ़ें

3 weeks ago

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