साहित्य

32 Poems

                                                                           एक बार अज्ञेय अपने लेखन के शुरूआती दिनों में शिवमंगल सिंह सुमन जी के साथ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी से मिलने के लिये गये। उस समय दोपहर हो रही थी और निराला जी अपने खाने के लिये कुछ बना रहे थे। तो जैसे ही उन्होंने द्वार पर दस्तक दी, निराला...और पढ़ें
                                                
19 hours ago
                                                                           ''दो वर्तमान का सत्य सरल
सुंदर भविष्य के सपने दो
हिंदी है भारत की बोली
तो अपने आप पनपने दो।"

कलम की स्वाधीनता के लिए आजीवन संघर्षरत रहे, गीतों के राजकुमार गोपाल सिंह नेपाली। धारा के विपरीत चलकर हिन्दी साहित...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           'यादों की बारात' उर्दू के बहुचर्चित शायर जोश मलीहाबादी की आत्मकथा है, हंसराज रहबर द्वारा अनूदित यह किताब 'राजपाल एण्ड सन्ज' प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। इस किताब में कई किस्से हैं। एक जगह जोश मलीहाबादी साहब फ़रमाते हैं- 

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1 day ago
                                                                           'नई कविता' में मुक्तिबोध के साथ समान रूप से आदरणीय और चर्चित कवि शमशेर बहादुर सिंह की पहचान यूं तो एक समर्थ और महत्वपूर्ण कवि की है, लेकिन उनकी लिखी ग़ज़लें, रुबाइयाँ, क़ते और अशआर भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं । 

शमशेर की शायरी का...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           घाटे का सौदा

दो दोस्तों ने मिल कर दस-बीस लड़कियों में से एक लड़की चुनी और बयालिस रुपये दे कर उसे ख़रीद लिया।
रात गुज़ार कर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?”
लड़की ने अपना नाम बताया तो वो भिन्ना गया। “हम से त...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           बकौल नदीम,

मंटो को एक अजीब शरारत सूझी। उसने सब शायरों को जमा करके कहा- "आप लोग एक-एक ऐसी नज़्म लिखें जो न उर्दू में हो, न हिन्दी में, बल्कि किसी भी ज़बान में न हो। आप लोगों के लफ़्ज़ों को गाने के ढंग से ही सुनने वाले अंदाज़ा लगा लेंगे...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           परवीन शाकिर ने 1982 में सेंट्रल सुपीरियर सर्विस की परीक्षा दी थी। जिसमें एक सवाल स्वयं उन्हीं पर पूछा गया था जिसे देखकर वह बेहद भावुक हो गयी थीं। 

परवीन शाकिर उर्दू अदब की सफ़ों में सबसे आगे नज़र आती हैं। एक ऐसी शायरा जिन्होंने औरत के...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           छुट्टी के एक दिन दोपहर को किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैं शहर में नया-नया आया था किसी की प्रतीक्षा भी न थी। ऊपर से झाँक कर देखा, हिंदी के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बुजुर्ग रचनाकार दरवाजा पीट रहे थे। मैं भाग कर नीचे पहुँचा, उन्हें दफ्तर में बैठाया। आदर सत्क...और पढ़ें
                                                
6 days ago
                                                                           इन दिनों के हालात का अंदाज़ा तो हम सभी को है, ज़रूरी है कि ज़हनी तौर पर हम स्वयं को मजबूत बनाए रखें। मन के हारे हार है और मन के जीते जीत, हम जानते ही हैं। कला और साहित्य से बेहतर और क्या होगा जो मानसिक मजबूती देने के साथ-साथ बौद्धिक तौर पर भी हमारा प...और पढ़ें
                                                
1 week ago
                                                                           जिन्हें ग़ालिब ने पाला परवरिश की मीर ने जिसकी
कई रिश्ते हमारे उन घरानों से निकलते हैं। 

ग़ज़ल की परंपरा से जुड़े सुरेन्द्र चतुर्वेदी का यह शेर उनकी अप्रतिहत शख़्सियत और शायरी का पर्याय है। मैंने बड़े-बड़े ग़ज़लगो देखे सुने पढ़े।...और पढ़ें
1 week ago
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