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प्रगतिशील धारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन शास्त्री की चुनिंदा कविताएं...

प्रगतिशील धारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन शास्त्री की चुनिंदा कविताएं...
                
                                                                                 
                            हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील धारा के प्रमुख कवियों में से एक त्रिलोचन शास्त्री भी थे। उनका वास्तविक नाम वासुदेव सिंह था और उन्हें साहित्य अकादमी और शलाका सम्मान आदि से भी सम्मानित किया जा चुका है। हिंदी कविता जगत से प्रेम रखने वालों को त्रिलोचन शास्त्री यूं ही नहीं भाते कि वे हिन्दी की प्रगतिशील कविता के आधार स्तम्भों में से एक हैं। बल्कि इसलिए कि उनकी कवितायें बहुत सधी हुई और निर्मल कवितायें हैं। उनकी कविताओं में खालिस हिंदुस्तानियत की महक आती है। हिंदुस्तान के खेत-खलिहान, ताल-तलैया और यहां की ज़मीन तक बोलती नज़र आती है।   
                                                                                                


सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई

सचमुच, इधर तुम्हारी याद तो नहीं आई,
झूठ क्या कहूँ, 
पूरे दिन मशीन पर खटना,
बासे पर आकर पड़ जाना
और कमाई  का हिसाब जोड़ना,
बराबर चित्त उचटना।
 
इस उस पर मन दौड़ाना, 
फिर उठकर रोटी करना,
कभी नमक से कभी साग से खाना 
आरर डाल नौकरी है, यह बिलकुल खोटी है।
इसका कुछ ठीक नहीं है आना जाना। 

आए दिन की बात है।
वहाँ टोटा टोटा छोड़ और क्या था।
किस दिन क्या बेचा-किना। 
कमी अपार कमी का ही था अपना कोटा,
नित्य कुआँ खोदना तब कहीं पानी पीना।

धीरज धरो, आज कल करते तब आऊँगा, 
जब देखूँगा अपने पुर कुछ कर पाऊँगा। आगे पढ़ें

कठिन यात्रा

1 year ago

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