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आज का शब्द: ब्रह्मचारिणी और अष्टभुजा शुक्ल की कविता- रात का कालिख धोकर सूर्य प्रतिदिन बनारस के मुँह में चंदन

आज का शब्द
                
                                                                                 
                            

'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- ब्रह्मचारिणी, जिसका अर्थ है- देवी दुर्गा, ब्रह्म चर्य व्रत का पालन करने वाली स्त्री, सरस्वती। प्रस्तुत है अष्टभुजा शुक्ल की कविता- रात का कालिख धोकर सूर्य प्रतिदिन बनारस के मुँह में चंदन लगा देता है 



सभ्यता का जल यहीं से जाता है
सभ्यता की राख यहीं आती है
लेकिन यहाँ से सभ्यता की कोई हवा नहीं बहती
न ही यहाँ सभ्यता की कोई हवा आती है
यह बनारस है

चाहे सारनाथ की ओर से आओ या लहरतारा की ओर से
वरुणा की ओर से आओ या गंगा की ओर से
इलाहाबाद की ओर से आओ या मुग़लसराय की ओर से
डमरू वाले की सौगंध
यह बनारस यहीं और इसी तरह मिलेगा

ठगों से ठगड़ी में
संतों से सधुक्कड़ी में
लोहे से पानी में
अँग्रेज़ों से अँग्रेज़ी में
पंडितों से संस्कृत में
बौद्धों से पालि में
पंडों से पंडई और गुंडों से गुंडई में
और निवासियों से भोजपुरी में
बतियाता हुआ यह बहुभाषाभाषी बनारस है
 

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2 months ago

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