आज का शब्द: धवल और बाबा नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता- बादल को घिरते देखा है

आज का शब्द- धवल और बाबा नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता: बादल को घिरते देखा है
                
                                                             
                            धवल यानि- श्वेत या उजला,  इसका एक अर्थ निर्मल और सुंदर भी होता है। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- धवल। प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता: बादल को घिरते देखा है
                                                                     
                            

अमल धवल गिरि के शिखरों पर,
बादल को घिरते देखा है।
छोटे-छोटे मोती जैसे
उसके शीतल तुहिन कणों को,
मानसरोवर के उन स्वर्णिम
कमलों पर गिरते देखा है,
बादल को घिरते देखा है। आगे पढ़ें

1 month ago
Comments
X