आज का शब्द: मधुमास और भगवतीचरण वर्मा की कविता- पतझड़ के पीले पत्तों ने...

आज का शब्द- मधुमास और भगवतीचरण वर्मा की कविता: पतझड़ के पीले पत्तों ने...
                
                                                             
                            'मधुमास' यानि चैत-वैसाख के महीने। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- मधुमास। प्रस्तुत है भगवतीचरण वर्मा की कविता: पतझड़ के पीले पत्तों ने...
                                                                     
                            

पतझड़ के पीले पत्तों ने
प्रिय देखा था मधुमास कभी;
जो कहलाता है आज रुदन,
वह कहलाया था हास कभी;
आँखों के मोती बन-बनकर
जो टूट चुके हैं अभी-अभी
सच कहता हूँ, उन सपनों में
भी था मुझको विश्वास कभी ।

आलोक दिया हँसकर प्रातः
अस्ताचल पर के दिनकर ने;
जल बरसाया था आज अनल
बरसाने वाले अम्बर ने;
जिसको सुनकर भय-शंका से
भावुक जग उठता काँप यहाँ;
सच कहता-हैं कितने रसमय
संगीत रचे मेरे स्वर ने । आगे पढ़ें

1 month ago
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