आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: शैलपुत्री और सरिता महाबलेश्वर सैल की कविता- निर्झर बहती रहती हूँ

आज का शब्द
                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है शैलपुत्री, जिसका अर्थ है- देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक, पार्वती, गौरी। प्रस्तुत है सरिता महाबलेश्वर सैल की कविता- निर्झर बहती रहती हूँ
                                                                                                


जहाँ जहाँ से गुजरी मैं
वहाँ-वहाँ जन्मी सभ्यता
जहाँ जहाँ ठहरी मैं
वहाँ-वहाँ बसी मानवता

नदी हूँ चलते रहना मुझे
रूके कभी ना मेरे पांव
ढूँढ रही मैं एक किनारा
बने जो एक मेरा ठांव

यात्रा मेरी जीवन सी, मिली
अवेहलना हर्ष-दुत्कार सभी
स्त्री जीवन है ही ऐसी
हर भाव मुझे स्विकार अभी आगे पढ़ें

2 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X