आज का शब्द: विछोह और बलबीर सिंह 'रंग' की कविता- मैं रस की बरखा कर लूँगा

आज का शब्द
                
                                                             
                            अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- विछोह, जिसका अर्थ है- प्रिय से दूर होना या प्रिय का वियोग। प्रस्तुत है बलबीर सिंह 'रंग' की कविता- मैं रस की बरखा कर लूँगा
                                                                     
                            

मैं रस की बरखा कर लूँगा, तुम अपना उर-आँगन दे दो।
बेचारा बादल क्या जाने,
तप्त धरा की प्यास कहाँ है?
भू को पता नहीं रस-रंजित
मेघों का अधिवास वहाँ है?

दोनों की पहचान पुरानी
फिर भी मिलन नहीं होता है,
थोड़ी सी दूरी कम कर दे
दुनिया को अवकाश कहाँ है?

चिर-विछोह स्वीकार करूँगा, मिलने का आश्वासन दे दो।
मैं रस की बरखा... आगे पढ़ें

3 months ago

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