क्या आए तुम जो आए घड़ी दो घड़ी के बाद
सीने में होगी साँस अड़ी दो घड़ी के बाद

क्या रोका अपने गिर्ये को हम ने कि लग गई
फिर वो ही आँसुओं की झड़ी दो घड़ी के बाद

कोई घड़ी अगर वो मुलाएम हुए तो क्या
कह बैठे...और पढ़ें
31 minutes ago
                                                                           इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का


ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है ...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           जब निकला था घर से तो कोई मंजिल ना थी
मेरे पास आज मेरा वजूद पूरी दुनिया देख रही
लोग अक्सर कुछ भी कह जाते है पर ये नहीं 
जानते कि हाथी बैठता भी है तो गदहों से ऊंचा होता है


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वर...और पढ़ें
8 hours ago
                                                                           हम देखेंगे
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो विधि के विधान में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के घने पहाड़
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम शासित के पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और सत्त...और पढ़ें
8 hours ago
                                                                           प्रबल यानि बलवान, प्रचंड या तेज। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- प्रबल। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता: विवशता से पर पसारे

प्रबल झंझावात, साथी!

देह पर अधिकार हारे,
विवशता से...और पढ़ें
8 hours ago
                                                                           कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है 
वो एक शख़्स जो सच-मुच ख़ुदाओं जैसा है 

हमारी शम-ए-तमन्ना भी जल के ख़ाक हुई 
हमारे शो'लों का आलम चिताओं जैसा है 

वो बस गया है जो आ कर हमारी साँसों में 
जभी तो लहजा...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           एक बार अज्ञेय अपने लेखन के शुरूआती दिनों में शिवमंगल सिंह सुमन जी के साथ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी से मिलने के लिये गये। उस समय दोपहर हो रही थी और निराला जी अपने खाने के लिये कुछ बना रहे थे। तो जैसे ही उन्होंने द्वार पर दस्तक दी, निराला...और पढ़ें
                                                
20 hours ago
                                                                           एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। 'मामाजी! मामाजी!' - लड़के ने लपक कर चरण छूए।

वे पहचाने नहीं। बोले - 'तुम कौन?' 'मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे?'
'मुन्ना?' वे स...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           प्यास ने गर्मी का बहाना किया
बरसात ने बादल का 
मृत्यु ने उम्र का 
दुःख के लिए जीवन काफ़ी था
नींद के पास कोई बहाना नहीं था 
वह आई ही नहीं
 
जाने वालों के पास जाने के बहाने थे 
आने वालों के पास आने...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           अजीब जुल्म करती हैं  तेरी यादें मुझ पर 
सो जाऊं तो उठा देती हैं जाग जाऊँ तो रुला देती है

खतम हो गई कहानी, बस कुछ अल्फ़ाज़ बाकी हैं 
एक अधूरे इश्क़ की एक मुकम्मल सी याद बाकी है

कोई उम्मीद नहीं थी हमें उनसे म...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया 
वो ग़ैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया 

हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब 
ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया 

मैं अपनी जाँ में उसे जज़्ब किस तरह करता 
उ...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           धरती का सीना फाड़ कर, बाहर अब निकला हूं ,
आसा नहीं है इतना, मेरा अस्तित्व मिटाना ।
सामर्थ अगर हैं मुझमे, फिर कैसा भय असमंजस ,
गिर गिर कर स्वंय ही सभल रहा, फिर क्यों किस्मत का गान सुनाना ।।
तूफानों में भी देखो, मैं सीना तान...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           ये दुनिया वही पुरानी है हर रोज नया सवेरा है..
कही लाशों का तमासा है कहीं गिद्धों का डेरा है।।

कोई चल निकला है मंजिल को पर राहों में अंधेरा है..
कही रोटी छीन गया मेरा कहीं सुना थाली तेरा है।।

कभी जड़ी बूटियों...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           गिनती उधार के सांसों की

सांसे ज्यों-ज्यों घटती जाती
मिट्टी पत्थर लोहा लक्कड़
सुन्न दीवारें अपनी लगने लगती,
मोहपाश मकड़जाल दूब,
पक्की करती जड़ें अपनी।

जड़ें आदमी की ज्यों-ज्यों
सूखती टूटती...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           आइए अब की ईद एक अलग अंदाज से मनाते हैं
अपनों के चेहरे पर खुशियाँ और मंद मुस्कान लाते हैं
माना की बाहर बहुत पाबंदी है पर अंदर से तो आजाद हैं हम
जुदा हुए हैं कितनों के अपने और कितनों की आँखें हैं नम
पर भूल कर सब कुछ आओ हम खु...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           तेरे होठों से निकली हर पुकार में सुन रही थी।
हे शिव मैं वहीं कैलाश में ही तो थी।

चल पड़े तुम निर्मोही मोह के बंधन में।
लेकर कांधों पर एक मिट्टी का ढेला
चीर निद्रा से खींच लाए तुम मुझे
बस कुछ देर सोने की चाह...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           कहां न्याय करते हो ईश्वर
कुछ तो पता न चलता
नर-पिशाच निर्भय ही रहता
बस निरीह ही मरता ।
तुम तो नियम बना कर रखे
"जन्म लिया मरना है
निश्चय जन्म मृत्यु हो जिसकी
चिंता क्या करना है" ।
किंतु तुम्हारी इ...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           वो सुबह फिर लौट आएगी, जब इस तबाही की भी तबाही होगी।
गलियों में बच्चों की किलकारियां गूंजेगी,
स्कूलों और कॉलेजों की घंटियां बजेंगी
और दफ्तरों की मेज पर फिर से फाइलें घूमेंगी।
वो सुबह फिर लौट आएगी, जब पार्टी और शादियां होंगी...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           ऐसा अस्पृश्य हुआ तन
कि संवेदना सिहर उठी
ठिठक गये कदम
फड़कती बाँहें भी मौन
भारी भीड़ में अकेला
देखो रोता है शव
रिश्तों के समीकरण बदल गये
व्यक्तियों के व्याकरण बदल गये
तन-मन की ये दूरियाँ
विक...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           चल चले चलो, चलते रहो,
ये नहीं वक्त, रुकने का ।
जंग है छिड़ी, बढ़ते रहो,
है नहीं पीछे, मुड़ने का ।।

दुश्मन हमारा दिखता नहीं है,
सांसों पे किये वार, बंधक बना रहा है ।
संग तेरे-मेरे, आराम से चल रहा है
...और पढ़ें
20 hours ago
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