साहित्य को प्रेम करने वाला और साहित्य को रचने वाला दोनों ही स्थितियों में शायद ही कोई अपवाद होगा जो महाकवि हरिवंश राय बच्चन के नाम से परिचित न हो। उन्होंने साहित्य को मधुशाला, मधुबाला, अग्निपथ और निशा निमंत्रण जैसी काव्य-रचनाएं दीं।  27 नवम्बर 1907 क...और पढ़ें
                                                
22 hours ago
                                                                           नामवर सिंह साहित्य के उत्तुंग शिखर पर बैठे हुए विरले नामों में से एक हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य और आलोचना को नए आयाम दिए हैं। उनके निधन से संपूर्ण साहित्य-संसार शोक में है। 

नामवर सिंह अपने बारे में कहा करते थे कि, "कहने को तो मैं भी...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           यशस्वी यानि जिसका यश चारों तरफ फैला हो, कीर्तिमान, सुविख्यात। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- यशस्वी। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता: अरे कबूतर ! मुग्ध हुआ मैं

धवल,
यशस्वी,
कांतिका...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           बुरी आदतों की ज़ंजीर में क़ैद कभी होना नहीं,
खेल खेलो मग़र ज़िन्दगी कोई खिलौना नहीं।

कोई तुम्हें बतायेगा कि मदहोशी में मज़ा है,
हक़ीक़त में भुगता जिसने वो जाने कैसी सज़ा है।

दुनिया में बहुत तुम्हें लुभाएँगे...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           दिन भर की थकान के बाद
घरों की तरफ लौटते हुए लोग 
भले लगते हैं 

दिन भर की उड़ान के बाद
घोंसलों की तरफ लौटती चिड़ियाँ 
सुहानी लगती हैं 

लोकिन जब 
धर्म की तरफ़ लौटते हैं लोग
इतिहास...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           कोरोना के डर से ही चलो,
जिंदगी में हमें फुर्सत तो मिली।
इसके संग वक्त गुजारने की,
चलो कुछ मोहलत तो मिली ।

सड़कों को कुछ राहत मिली,
घर की कुछ रौनकें तो बढ़ी।
बहुत समय बाद घर साथ बैठा,
साथ खाने क...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           इस मतलबी दुनिया में कुछ अपने अनजाने से,
मतलब पूरा होते ही दूर भागते हैं ये निभाने से।

कहीं रिश्तों की डोर टूट गई, कहीं गांठ पड़ गई,
समझौता होता है अगर समझे कोई समझाने से।

यारों ग़म तो इनको दूसरों की ख़ुशी स...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           जैसे कस्तियों ने लहरों को छेड़ा हो,
वो मेरे दिलों के किनारे को छू कर निकल गया।

अभी पत्तियाँ पेडों की शाख में आई ना थी,
की कोई राहगीर उसपे पत्थर मार कर निकल गया।

आँखों में न जाने फिर से कैसी नमी थी,
ज...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           जो होना हो, वह किसी न किसी दिन हो जाता है,
जो नामुमकिन हो, वह भी मुमकिन हो जाता है।

वक़्त कभी एक सा रहा नहीं और ना रहेगा कभी,
ग़ुरूर मत रखना जो होता है वह भी छिन जाता है।

ना सोचना कि गुनाहों का उसको होता मा...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           उस बज़्म में जो कुछ नज़र आया नज़र आया
अब कौन बताए कि हमें क्या नज़र आया
- हिज्र नाज़िम अली ख़ान 


वही नज़र में है लेकिन नज़र नहीं आता
समझ रहा हूँ समझ में मगर नहीं आता
- कैफ़ी हैदराबादी ...और पढ़ें
1 minute ago
                                                                           मैंने उड़ते हुऐ एक पंछी से पूछा
कि इंसान क्यों नहीं उड़ सकता
तो पंछी ने बहुत ही प्यारा जवाब दिया ,
इंसान के इंसानियत रूपी पंख ही टूट चुके हैं !
- रामवल्लभ तापड़िया " अलग...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           अगर तू चांद, तो मुझे तेरा दाग बनकर रहना है।
अगर तू गंगा घाट, तो मुझे तेरे संग बहना है।

अपनी आंखों में काजल सा सजा ले,
या फिर आंसुओ की तरह बहा दे,

झे तो सिर्फ तेरे ही आंखों में दिखना है।
मुझे तो हर हा...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           यार मिल गया राहों में,
भर लिया उसे मैंने बाहों में।
ले गया उसे अपने गाँव में,
बैठ गये हम पीपल की छांव में।
मजा बहुत उसे आया,
जब जमीं पर बैठकर खाना खाया।
पिया कुएं का ठंडा ठंडा पानी,
गदगद हो गया बहुत वो...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           जो दिल में है बे'शुमार है।
तेरा प्यार है, एतबार है।।
तू भूल कर मुझे जी सके।
तुझे इसका भी इख़्तियार है।।
- डाॅ फौज़िया नसीम शाद
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           भाग्य भरोसे कुछ नहीं होगा,
कर्म की लत लगानी है।

हारे मन से कुछ नहीं होगा,
जीत की शर्त लगानी है।

किनारे बैठे कुछ नहीं होगा,
उफ़ानों में छलांग लगानी है।

आसमां देखें कुछ नहीं होगा,
...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           कवि जी,
झूठ मूठ ही गाओ ! 
सच कहना है कठिन मगर तुम 
इतना मत हकलाओ! 

फूलदान  में  फूल  बेहया  के  तुमने पहुँचाये
फिर उनको बेला बतलाकर गीत गंध के गाये
जो अब तक गाते आये हो
उसको ही दोहराओ!
क...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           मन रे क्यों पीड़ा पहुँचाते, मन रे क्यों,
अकेलेपन का अहसास मुझे कराते।
संसार के अंधेरों से क्यों मुझे डराते,
मन रे क्यों पीड़ा पहुँचाते, मन रे क्यों।

सुख - दुःख तो आना-जाना है,
जीवन कुछ खोना कुछ पाना है।...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           स्वप्न उजले से हैं पर, स्याह सी क़िस्मत अपनी।
जिंदगी करती है परेशानियों से खिदमत अपनी।
बड़ी मुद्दतों से परेशान हूँ अनजान हूँ मुसीबतों से,
काश के ऊपर वाला बरसा दे रहमत अपनी।
अच्छे दौर की यादें आती हैं ,कुछ खुशी कुछ गम लेकर।...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           समय चला, पर कैसे चला
पता ही नहीं चला....
जिंदगी के इस सफ़र में,
उम्र कैसे निकली
पता नहीं चला!
बच्चों की ख्वाइशें पूरा करते करते,
मशगूल हुए माँ बाप,
कब बच्चे दूर हो चले पता नहीं चला
कहते थे बेटाऔर पढ़ें
10 hours ago
                                                                           ये सिलसिले अटूट शिकायतों के कबतक चलेंगे,
कुछ इससे इतर बातें भी होती हैं, जिंदगी के लिए।
अनजान और बेजान बातों में उलझना ठीक नही,
संज़ीदगी बातों में भी जरूरी है ,दिल्लगी के लिए।
मन से तेरा होना पर जुबान से बयां न कर पाना...और पढ़ें
23 hours ago
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