उर्दू अदब

103 Poems

                                                                           क्या आए तुम जो आए घड़ी दो घड़ी के बाद
सीने में होगी साँस अड़ी दो घड़ी के बाद

क्या रोका अपने गिर्ये को हम ने कि लग गई
फिर वो ही आँसुओं की झड़ी दो घड़ी के बाद

कोई घड़ी अगर वो मुलाएम हुए तो क्या
कह बैठे...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का


ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है ...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है 
वो एक शख़्स जो सच-मुच ख़ुदाओं जैसा है 

हमारी शम-ए-तमन्ना भी जल के ख़ाक हुई 
हमारे शो'लों का आलम चिताओं जैसा है 

वो बस गया है जो आ कर हमारी साँसों में 
जभी तो लहजा...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया 
वो ग़ैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया 

हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब 
ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया 

मैं अपनी जाँ में उसे जज़्ब किस तरह करता 
उ...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           समझता हूँ कि तू मुझ से जुदा है
शब-ए-फ़ुर्क़त मुझे क्या हो गया है

तिरा ग़म क्या है बस ये जानता हूँ
कि मेरी ज़िंदगी मुझ से ख़फ़ा है

कभी ख़ुश कर गई मुझ को तिरी याद
कभी आँखों में आँसू आ गया है
...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           बात मेरी कभी सुनी ही नहीं
जानते वो बुरी भली ही नहीं

दिल-लगी उन की दिल-लगी ही नहीं
रंज भी है फ़क़त हंसी ही नहीं

लुत्फ़-ए-मय तुझ से क्या कहूं ज़ाहिद
हाए कम-बख़्त तू ने पी ही नहीं

उड़ गई...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या / जौन एलिया 

उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या
दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या मेरी हर बात बे-असर ही रही
नक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या मुझ को तो कोई टोकता भी नहीं
यही होता है...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो 
अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो 

ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए 
घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो 

फ़िलहाल इस से बचने का है एक रास्ता 
वो ये कि इस से बच के...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           ये समुंदर है किनारे ही किनारे जाओ 
इश्क़ हर शख़्स के बस का नहीं प्यारे जाओ 

यूँ तो मक़्तल में तमाशाई बहुत आते हैं 
आओ उस वक़्त कि जिस वक़्त पुकारे जाओ 

दिल की बाज़ी लगे फिर जान की बाज़ी लग जाए 
इश्क़...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           दीप जिस का महल्लात ही में जले
चंद लोगों की ख़ुशियों को ले कर चले
वो जो साए में हर मस्लहत के पले
ऐसे दस्तूर को सुब्ह-ए-बे-नूर को
मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता

मैं भी ख़ाइफ़ नहीं तख़्ता-ए-दार से
मैं भी...और पढ़ें
1 day ago
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