हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है - हसरत मोहानी

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चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है 


नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं 

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2 months ago

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