इब्न-ए-इंशा के शेर

ibne insha selected sher
                
                                                             
                            

कब लौटा है बहता पानी बिछड़ा साजन रूठा दोस्त
हम ने उस को अपना जाना जब तक हाथ में दामां था


रात आ कर गुज़र भी जाती है
इक हमारी सहर नहीं होती

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3 weeks ago
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