पुकारना ही पड़ेगा तो क्या कहूंगा तुम्हें - जमीलुद्दीन आली

jamiluddin aali ghazal khuda kahunga tumhein nakhuda kahunga tumhein
                
                                                             
                            

ख़ुदा कहूंगा तुम्हें नाख़ुदा कहूंगा तुम्हें
पुकारना ही पड़ेगा तो क्या कहूंगा तुम्हें

मिरी पसंद मिरे नाम पर न हर्फ़ आए
बहुत हसीन बहुत बा-वफ़ा कहूंगा तुम्हें

हज़ार दोस्त हैं वज्ह-ए-मलाल पूछेंगे
सबब तो सिर्फ़ तुम्हीं हो मैं क्या कहूंगा तुम्हें

अभी से ज़ेहन में रखना नज़ाकतें मेरी
कि हर निगाह-ए-करम पर ख़फ़ा कहूंगा तुम्हें

अभी से अपनी भी मजबूरियों को सोच रखो
कि तुम मिलो न मिलो मुद्दआ कहूंगा तुम्हें

क़सम शराफ़त-ए-फ़न की कि अब ग़ज़ल में कभी
तुम्हारा नाम न लूंगा सबा कहूंगा तुम्हें

4 months ago

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