बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का: जावेद अख़्तर

जावेद अख्तर
                
                                                             
                            बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का 
                                                                     
                            
हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का 

अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी 
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का 

जो फ़स्ल ख़्वाब की तय्यार है तो ये जानो 
कि वक़्त आ गया फिर दर्द कोई बोने का  आगे पढ़ें

4 weeks ago
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