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कुँअर बेचैन: है अब मेरी मंज़िल का पता आपकी आँखें

kunwar bechain urdu ghazal main dil hoon aur iss dil ka pata aapki aankhein
                
                                                                                 
                            

मैं दिल हूँ और इस दिल का पता आपकी आँखें


है अब मेरी मंज़िल का पता आपकी आँखें।

हर शख्स की मुश्किल का पता आपकी आँखें
इस हुस्न की महफ़िल का पता आपकी आँखें।

दर्पण में जिन्हें आप भी खुद देखना चाहें
खुद आपकी मंज़िल का पता आपकी आँखें।

मक़्तल को सभी कहते हैं सबसे बड़ा क़ातिल
मक़्तल के भी क़ातिल का पता आपकी आँखें।

दुनिया के भंवर में है 'कुँअर' नाव-सा जीवन
और नाव के साहिल का पता आपकी आँखें।

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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