'मंज़िल' पर शायरों के अल्फ़ाज़

manzil shayari collection
                
                                                             
                            

हम को मंज़िल ने भी गुमराह किया
रास्ते निकले कई मंज़िल से
- हफ़ीज़ होशियारपुरी 


कोई मंज़िल के क़रीब आ के भटक जाता है
कोई मंज़िल पे पहुँचता है भटक जाने से
- क़सरी कानपुरी 

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2 months ago

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