Mohammad Alvi poetry: मैं अपना नाम तिरे जिस्म पर लिखा देखूँ 

उर्दू अदब
                
                                                             
                            मैं अपना नाम तिरे जिस्म पर लिखा देखूँ 
                                                                     
                            
दिखाई देगा अभी बत्तियाँ बुझा देखूँ 

फिर उस को पाऊँ मिरा इंतिज़ार करते हुए 
फिर उस मकान का दरवाज़ा अध-खुला देखूँ 

घटाएँ आएँ तो घर घर को डूबता पाऊँ 
हवा चले तो हर इक पेड़ को गिरा देखूँ 

किताब खोलूँ तो हर्फ़ों में खलबली मच जाए 
क़लम उठाऊँ तो काग़ज़ को फैलता देखूँ  आगे पढ़ें

4 months ago

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