नासिर काज़मी की ग़ज़ल: दिया सा रात भर जलता रहा है 

नासिर काजमी
                
                                                             
                            तिरे आने का धोका सा रहा है 
                                                                     
                            
दिया सा रात भर जलता रहा है 

अजब है रात से आँखों का आलम 
ये दरिया रात भर चढ़ता रहा है 

सुना है रात भर बरसा है बादल 
मगर वो शहर जो प्यासा रहा है  आगे पढ़ें

1 month ago

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