तोड़ लेंगे हर इक शय से रिश्ता तोड़ देने की नौबत तो आए - साहिर लुधियानवी

sahir ludhianvi ghazal tod lenege har ik shay se rishta
                
                                                             
                            

तोड़ लेंगे हर इक शय से रिश्ता तोड़ देने की नौबत तो आए
हम क़यामत के ख़ुद मुंतज़िर हैं पर किसी दिन क़यामत तो आए

हम भी सुक़रात हैं अहद-ए-नौ के तिश्ना-लब ही न मर जाएं यारो
ज़हर हो या मय-ए-आतिशीं हो कोई जाम-ए-शहादत तो आए

एक तहज़ीब है दोस्ती की एक मेयार है दुश्मनी का
दोस्तों ने मुरव्वत न सीखी दुश्मनों को अदावत तो आए

रिंद रस्ते में आंखें बिछाएं जो कहे बिन सुने मान जाएं
नासेह-ए-नेक-तीनत किसी शब सू-ए-कू-ए-मलामत तो आए

इल्म ओ तहज़ीब तारीख़ ओ मंतिक़ लोग सोचेंगे इन मसअलों पर
ज़िंदगी के मशक़्क़त-कदे में कोई अहद-ए-फ़राग़त तो आए

3 weeks ago
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