'ठिकाना' पर कहे शायरी के अल्फ़ाज़

Thikana shayari collection
                
                                                             
                            

क्या ख़ाना-ख़राबों का लगे तेरे ठिकाना
उस शहर में रहते हैं जहां घर नहीं होता
- क़लक़ मेरठी


फ़लक ने भी न ठिकाना कहीं दिया हम को
मकां की नीव ज़मीं से हटा के रक्खी थी
- ज़फ़र गोरखपुरी

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2 months ago
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