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Social Media Poetry: ज़ख़्म-ए-दिल पे मरहम लगाओ यारों

सोशल मीडिया
                
                                                                                 
                            बिठाकर  डोली में  उसे  एक इंसान  ले गया
                                                                                                

अजनबी शहर का लड़का मेरी जान ले गया 

वो  फूल  था  मेरा   मैं  उसका   माली  था
मैं  दरबार-ए-ख़ुदा  में  उसका  सवाली था
चैन-ओ-क़रार  उसी   के   पास   था   मेरा
ज़ालिम  दुनिया  में   वही   ख़ास  था  मेरा 

छीनकर वो  मुझसे  मेरा ये  गुमान  ले  गया
अजनबी शहर का लड़का मेरी जान ले गया 

तितलियों     से    उसका     दोस्ताना    था
उसे     प्यार     मुझसे       वालेहाना     था
रंग   मोहब्बत   के   उसमें   लगाए  थे   मैंने
फूल  ख़्वाहिशों  के   उसमें  सजाए  थे  मैंने

हरीफ़ मेरा खुशियों से भरा  गुलदान ले गया
अजनबी शहर का लड़का मेरी जान ले गया  आगे पढ़ें

1 month ago

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