सोशल मीडिया: क्या फिर कभी नुक्कड़ के ठेले पर चाय पीते और ठहाके लगते लोग नज़र आएंगे

सोशल मीडिया: क्या फिर कभी नुक्कड़ के ठेले पर चाय पीते और ठहाके लगते लोग नज़र आएंगे
                
                                                             
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घर में अकेले कैद 
मानसिक संतुलन खो 
लड़-झगड़ रहे हैं उनसे
जो कहीं किसी और घर में
कैद हैं अकेले
और जो अपने प्यार के साथ फंस गए हैं
उनके बीच समाप्त हो रहा है प्रेम 
ढाई कमरे में आदमी से ज्यादा
उसकी सांसे ठुंसी हुई है
अपनी-अपनी धरती पर 
पहुंचने के लिए लाखों का सैलाब
तमाम बांधों और रुकावटों को तोड़ता
चल पड़ा है
पॉलीथीन की एक थैली में
सारी गृहस्थी भरकर
गिरता, बिखरता और मरता
प्रकाश वर्ष की यात्रा में पैदल आगे पढ़ें

1 year ago

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