मैं रुक तो जाता 
अगर मेरे पास लौटने के लिए 
जेब में उम्मीद का एक भी सिक्का होता : 
खोजे नहीं मिला एक भी 
उस प्याले में जिसमें जब-तब की जमा रेज़गारी 
मैं डाल दिया करता था। 

मुझे पता है कि बिना बताए ...और पढ़ें
25 minutes ago
                                                                           घोर ध्वनि करने या होने की प्रकिया अथवा बादलों की गड़गड़ाहट को गर्जन कहते हैं। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गर्जन। प्रस्तुत है बलबीर सिंह 'रंग' की कविता:  मिली अचानक राह बता दो... 

मिली अचानकऔर पढ़ें
50 minutes ago
                                                                           मैं मरूंगा सुखी
क्योंकि तुमने जो जीवन दिया था—
(पिता कहलाते हो तो जीवन के तत्व पांच
चाहे जैसे पुंज-बद्ध हुए हों, श्रेय तो तुम्हीं को होगा—)
उससे मैं निर्विकल्प खेला हूं—
खुले हाथों उसे मैंने वारा है—
धज्जियां...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           क्या आए तुम जो आए घड़ी दो घड़ी के बाद
सीने में होगी साँस अड़ी दो घड़ी के बाद

क्या रोका अपने गिर्ये को हम ने कि लग गई
फिर वो ही आँसुओं की झड़ी दो घड़ी के बाद

कोई घड़ी अगर वो मुलाएम हुए तो क्या
कह बैठे...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का


ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है ...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           जब निकला था घर से तो कोई मंजिल ना थी
मेरे पास आज मेरा वजूद पूरी दुनिया देख रही
लोग अक्सर कुछ भी कह जाते है पर ये नहीं 
जानते कि हाथी बैठता भी है तो गदहों से ऊंचा होता है


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वर...और पढ़ें
9 hours ago
                                                                           हम देखेंगे
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो विधि के विधान में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के घने पहाड़
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम शासित के पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और सत्त...और पढ़ें
9 hours ago
                                                                           प्रबल यानि बलवान, प्रचंड या तेज। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- प्रबल। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता: विवशता से पर पसारे

प्रबल झंझावात, साथी!

देह पर अधिकार हारे,
विवशता से...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है 
वो एक शख़्स जो सच-मुच ख़ुदाओं जैसा है 

हमारी शम-ए-तमन्ना भी जल के ख़ाक हुई 
हमारे शो'लों का आलम चिताओं जैसा है 

वो बस गया है जो आ कर हमारी साँसों में 
जभी तो लहजा...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           एक बार अज्ञेय अपने लेखन के शुरूआती दिनों में शिवमंगल सिंह सुमन जी के साथ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी से मिलने के लिये गये। उस समय दोपहर हो रही थी और निराला जी अपने खाने के लिये कुछ बना रहे थे। तो जैसे ही उन्होंने द्वार पर दस्तक दी, निराला...और पढ़ें
                                                
21 hours ago
X