सहूलियत: घर बैठे बिजली का बिल जमा कर सकेंगे उपभोक्ता, न बिल बनवाने की टेंशन, न लाइन में लगने की जरूरत

नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 28 Sep 2021 12:51 PM IST

सार

अब बिजली का बिल जमा करने के लिए न तो बिल बनवाने की टेंशन होगी और न ही लाइन में लगने का झंझट होगा। उपभोक्ता घर बैठे बिल जमा कर सकेंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

राजधानी लखनऊ के करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को फिर से घर पर ही बिजली बिल जमा करने की सुविधा मिलने जा रही है। यह सुविधा शुरू होने पर आप घर पर ही बिल जमा करने के साथ ही हाथोंहाथ रसीद भी हासिल कर सकेंगे। वहीं बिलिंग केंद्र पर कतार में लगने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। उम्मीद है कि यह सुविधा अक्तूबर से ही शुरू हो जाएगी।
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घर पर ही सुविधा देने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और चंडीगढ़ की आईटी कंपनी मेसर्स टीडीएस मैनेजमेंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के बीच अनुबंध होने जा रहा है। अनुबंध से पहले मध्यांचल निगम के अधीक्षण अभियंता (वाणिज्य) विपिन जैन ने 19 सितंबर को कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिया है।


कंपनी अपने मीटर रीडर्स का ई-वॉलेट बनाएगी। रीडर जितने रुपये का बिल जमा करके रसीद जारी करेगा वह उसके वॉलेट से कट जाएगा। रीडर के वॉलेट को रिचार्ज कराने का काम कंपनी को ही करना पड़ेगा। मध्यांचल निगम कंपनी को एक बिल बनाने एवं जमा करने  के एवज में 20.50 रुपये का भुगतान करेगा।

इस व्यवस्था से हमें क्या फायदा

न बिल बनवाने की टेंशन, न जमा करने के लिए कतार की झंझट
राजधानी में अब तक करीब 3 लाख ही उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, जबकि कुल उपभोक्ताओं की संख्या करीब 10 लाख है। यानी 7 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जिनकी रीडिंग लेकर बिल बनाया जाता है। सुविधा शुरू होने पर ऐसे उपभोक्ताओं को बिल बनवाने या जमा करने के लिए कतार में नहीं लगना पड़ेगा। स्मार्ट मीटर वाले भी बिल जमा करने के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे।

कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ेगा
उपभोक्ता सर्विस चार्ज का भुगतान करता है। इसी सर्विस चार्ज से कंपनी को एक बिल बनाने व जमा करने के एवज में 20.50 रुपये का भुगतान किया जाएगा। यानी उपभोक्ता को सहूलियत के एवज में कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

लेसा को क्या फायदा: यूनिट स्टोर करने के खेल पर लगेगा अंकुश
टीडीएस कंपनी को शत प्रतिशत प्रोब सिस्टम (एमआरआई बेस) से बिलिंग करनी पड़ेगी। आसान शब्दों में कहें तो रीडर मीटर में डाटा केबल से रीडिंग यूनिट को डाउनलोड करेगा। इसके बाद वह बिल बनाएगा। दावा किया जा रहा है कि इस सिस्टम से जितनी यूनिट की खपत हुई रही होगी, उतने का ही बिल बनेगा। यानी मीटर में रीडिंग स्टोर करने के खेल पर अंकुश लग सकेगा।

बिल समय पर जमा होंगे, लेसा की आर्थिक सेहत सुधरेगी

बिल समय पर तैयार नहीं होने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इससे उपभोक्ता समय पर बिल जमा कर सकेगा। इस व्यवस्था से लेसा की आर्थिक सेहत भी सुधरेगी।

एक दशक पहले हुई थी शुरुआत
लेसा ने  राजधानी में वर्ष 2011 में उपभोक्ता की चौखट पर बिल जमा करने की शुरुआत की थी। यह सुविधा उन्हीं उपभोक्ताओं को थी जो चेक से भुगतान करते थे। यह व्यवस्था करीब दो साल तक चली। एजेंसी कर्मियों की गड़बड़ी करने की शिकायतों के बाद इसे बंद कर दिया गया।

राजस्व वसूली बढ़ेगी
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ के प्रबंध निदेशक सूर्यपाल गंगवार का कहना है कि बहुत से उपभोक्ता बिल पाने के बाद भी किन्हीं कारणों से बिलिंग केंद्र नहीं पहुंच पाने से उसका भुगतान नहीं कर पाते। ऐसे उपभोक्ताओं को इस सुविधा से काफी सहूलियत मिलेगी। इससे राजस्व वसूली भी बढ़ेगी।
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