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छह साल में 200 लोगों के खातों से उड़ाए 20 करोड़ : बैंक मैनेजर, बीमा कंपनी एजेंट तो कभी ट्रेजरी अधिकारी बन करते थे ठगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 20 Jul 2021 10:46 AM IST

सार

जालसाज यह रकम महंगे होटलों में खान-खाने और ब्रांडेड कपड़े व अन्य चीजों की शॉपिंग में उड़ाते थे। गिरोह का नेटवर्क छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में है।
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साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर)
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

साइबर क्राइम सेल के हत्थे चढ़ा जालसाज गिरोह छह सालों में 200 लोगों से 20 करोड़ रुपये की ठगी की है। यह बात गिरोह के सरगना व मास्टर माइंड प्रमोद मंडल ने पुलिस की पूछताछ में कुबूली है। जालसाज यह रकम महंगे होटलों में खान-खाने और ब्रांडेड कपड़े व अन्य चीजों की शॉपिंग में उड़ाते थे। साइबर क्राइम सेल के एसीपी विवेक रंजन राय के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में है। जालसाज गिरोह के गुर्गे कभी बैंक मैनेजर, बीमा कंपनी एजेंट तो कभी ट्रेजरी अधिकारी बनकर ठगी करते थे।  
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झारखंड, दिल्ली व पं. बंगाल में खरीदी जमीनें
प्रमोद मंडल ने कुबूला कि जालसाजी की रकम से लग्जरी मकान बनवाए हैं और महंगी कारें  खरीदी हैं। झारखंड, दिल्ली व पं. बंगाल में कई स्थानों पर जमीनें खरीदीं हैं। प्रमोद ने बताया कि कुछ दिन पहले गिरोह के बचे सदस्य दिल्ली चले गए और वहां भी धंधा करना शुरू कर दिया था। चार-पांच दिन पहले राजेश के मोबाइल पर करीब तीन लाख रुपये फर्जी कॉलिंग कर एक खाते से ट्रांसफर किए गए हैं।


काम खत्म होने के बाद तोड़ देते थे सिम व मोबाइल
पुलिस के मुताबिक, गिरोह फर्जी नाम व पते पर सिम लेता था। इन्हीं फर्जी नाम व पतों के माध्यम से बैंक में खाते भी खुलवाए। पूछताछ में सामने आया कि वारदात अंजाम देने के बाद वह मोबाइल व सिम को तोड़कर फेंक देते थे। ताकि कोई आईएमईआई नंबर के जरिए उन तक पहुंच न सके। खाता खुलवाने व सिम एक्टीवेट करने के लिए टेली वेरिफिकेशन में कोई रुकावट न हो। इसके लिए एक प्रति घर पर रख देते। आरोपियों ने बताया कि कुछ दिन पहले पुलिसकर्मी छोटे लाल खान के खाते से 10 लाख रुपये भी उड़ाए थे।

ऐसे बांटे थे ठगी के 53 लाख रुपये
प्रमोद मंडल ने पुलिस को बताया कि पिछले साल रिटायर सचिवालय कर्मचारी से ठगे गए 53 लाख रुपये का बंटवारा किया था। इस रकम में प्रमोद व उसके भाई मनोज के हिस्से में 9-9 लाख रुपये, अन्य साथी प्रमोद व सुमन के हिस्से में 9-9 लाख, राजेश, करन, रंजीत, रूपक, प्रमोद, योगांद, लल्लन, नीरज, हरिहर, गोपाल, राहुल आर्या प्रत्येक को 1-1 लाख व जितेंद्र को 50 हजार हिस्से में आया था बाकी का पैसा शेष उपरोक्त लोगों को उनके काम के हिसाब से दिया गया था।
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