दुधवा में बढ़ रही वनराजों की संख्या

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 09 Feb 2014 10:58 AM IST
dudhwa national park
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दुधवा वन्य क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ रही है। इसके संकेत बाघों की गणना के पहले चरण में मिले हैं।
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अभी जो गणना हुई है, उसमें 15 से 20 प्रतिशत तक बाघों की संख्या बढ़ने का अनुमान है।

पूरे क्षेत्र में बाघों की गणना का काम इसी वर्ष पूरा कर लिया जाएगा। दिसंबर 2014 तक भारत सरकार की ओर से इनकी संख्या का आंकड़ा जारी होने की उम्मीद है।

दुधवा के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह ने बताया कि करीब 884 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले दुधवा क्षेत्र में दो हिस्से आते हैं। एक किशनपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है, जिसका 204 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र है।


बाकी 680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र दुधवा के नाम से जाना जाता है। गणना के लिए पहले चरण में किशनपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में कैमरे लगाए गए थे। इसमें 15 से 20 फीसदी संख्या बढ़ने का रुझान सामने आया है।

अब दुधवा क्षेत्र में गणना के लिए 104 स्पॉट पर 208 कैमरे लगाए गए हैं। गणना के आंकड़े भारत सरकार जारी करेगी।

इसलिए इस बारे में वह कुछ नहीं बोल सकते। हालांकि, उन्होंने गणना का काम 2014 में ही पूरा होने और दिसंबर तक आंकड़े जारी होने की बात कही।

बाघ संरक्षण में जुटे कई संगठन
दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण में कई संगठन जुटे हैं। देशभर में सेव अवर टाइगर कैंपेन चला रही फोन कंपनी एयरसेल यहां वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) और वन विभाग की मदद से काम कर रही है।

यहां लोगों और जानवरों के बीच संघर्ष रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए प्राइमरी रिस्पांस टीम व रेपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है।

ये टीमें वन्य क्षेत्र में रह रहे लोगों पर जानवरों का हमला होने पर लोगों के इलाज आदि में मदद करती है। एयरसेल की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी हेड बृंदा मल्होत्रा के अनुसार जागरूकता के प्रयासों से संघर्ष की घटनाओं में कुछ कमी आई है।

गजराज की सवारी कीजिए, गैंडा-टाइगर से भी मिलिए
ऊंचे-ऊंचे साखू-शाल के पेड़। हाथी को भी ढंक सकने वाली दस-दस फीट तक ऊंची खरपतवार। प्रदूषण मुक्त स्वच्छ, निर्मल, शीतल हवा और शांत वातावरण में रह-रहकर सुनायी देती अलग-अलग पक्षियों व जंगली जानवरों की तरह-तरह की आवाजें।

कुछ ऐसा ही अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य है दुधवा वन्य क्षेत्र का। आप भी इससे रू-ब-रू हो सकते हैं। इसके लिए आपको जाना होगा, राजधानी से करीब 180 किलोमीटर दूर दुधवा नेशनल पार्क में।

टाइगर संरक्षण के लिए विशेष रूप से आरक्षित कई सौ वर्ग किलोमीटर में फैले इस वनक्षेत्र में पर्यटकों को घुमाने के विशेष इंतजाम हैं।

पार्क क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को आप खुली जिप्सी से घूम सकते हैं, तो बिना तय मार्ग वाले राइनो रीहेबिलिटेशन सेंटर में मनचाहे स्थानों को गजराज यानी हाथी की सवारी करके देख सकते हैं। गजराज आपको न केवल घुमाएंगे बल्कि खुले में विचरण करने वाले टाइगर व गैंडा से भी मिलवाएंगे।

दुधवा पार्क घूमने के लिए आप वहां जाकर रुक सकते हैं। वन विभाग ने वहां आम पर्यटकों के लिए थारू हट बनवाए हैं। 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से ये हट बुक होता है।

इसकी अग्रिम बुकिंग भी होती है। दुधवा वन क्षेत्र में टाइगर, गैंडा, बारहसिंघा, हिरणों की विभिन्न प्रजाति चीतल, काकड़, पाड़ा आदि के अलावा 423 पक्षियों की प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

घूमने के लिए यहां जिप्सी का एक हजार रुपये और 200 रुपए गाइड का शुल्क है। एक हाथी पर चार लोग घूम सकते हैं और उसका 600 रुपये शुल्क है।

इसमें वह करीब दो किलोमीटर घुमाता है। हाथी की सवारी के दौरान महावत की कोशिश होती है कि वह गैंडे के अलावा बाघ भी आपको दिखाए। क्षेत्र में पोखरों के किनारे मगरमच्छ व अन्य वन्यजीव भी आसानी से दिखते हैं।

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