सियासी पतीले में भारी उबाल: मुरादाबाद मंडल में इस बार किसकी गलेगी दाल, 2017 में भाजपा को सपा से मिली थी कड़ी टक्कर

अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 05 Dec 2021 12:47 AM IST

सार

1957 में पहली बार अस्तित्व में आई मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट का अपना इतिहास रहा है। इस सीट पर हुए अब तक के 16 विधानसभा चुनावों में से 12 बार मुस्लिम विधायक जीते। 1993 में भाजपा को यहां से पहली बार सफलता मिली थी। अयोध्या लहर में सुरेश प्रताप सिंह चुनाव जीत गए थे। उसके बाद से भाजपा यहां जीत का स्वाद चखने के लिए तरस ही रही है।
यूपी का रण
यूपी का रण - फोटो : amar ujala
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विस्तार

मुरादाबाद मंडल में चुनावी घमासान इस बार भी रोचक होगा। यहां के सियासी पतीले में उबाल भी खूब है। ऐसे में सभी दल अपनी दाल गलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। मुरादाबाद इतना खास क्यों? क्योंकि यही ऐसा मंडल था जिसने भाजपाई अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को मजबूती से रोका। भाजपा और सपा के बीच यहां सीधा मुकाबला हुआ, जो लगभग बराबरी पर छूटा। यहां जो हालात रहे हैं और जो बन रहे हैं, उससे सवाल उठ रहे हैं कि इस सियासी उबाल को कौन थामेगा। बहरहाल, इस सवाल का जवाब चुनाव के बाद ही मिलेगा। 
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मुरादाबाद मंडल की कुल 27 सीटों में से 14 पर भाजपा ने परचम फहराया था तो 13 सीटों पर सपा ने कब्जा जमाया था। हालांकि, स्वार सीट पर सपा से जीते मो. आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम खां को आयु मामले में विधायकी गंवानी पड़ गई, तो नूरपुर में हुए उपचुनाव में सपा ने भाजपा से यह सीट छीन ली। इस चुनाव में भाजपा-सपा के सामने जीती सीटें कायम रखने की बड़ी चुनौती होगी। 


लोकसभा चुनाव में मंडल की सभी सीटें भाजपा ने गंवाईं
चुनौतियों की एक झलक 2019 के लोकसभा चुनाव में मिल भी गई थी। पूरे देश में मोदी लहर चल रही थी। फिर भी मुरादाबाद ऐसा मंडल रहा जहां भाजपा चारों खाने चित हो गई। मंडल की छह सीटों में से एक भी वह हासिल नहीं कर सकी। जबकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में रामपुर से डॉ. नैपाल सिंह, संभल से सतपाल सैनी, मुरादाबाद से कुंवर सर्वेश, अमरोहा से कंवर सिंह तंवर, बिजनौर से कुंवर भारतेंद्र सिंह और नगीना से यशवंत सिंह ने भगवा पताका फहराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणामों का संदेश फिलहाल तो यही है कि भगवा खेमे के लिए यहां के चुनावी समीकरणों को साधना काफी चुनौतीपूर्ण है। बहरहाल, जनता की नब्ज पर हाथ रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुरादाबाद के कई दौरे कर चुके हैं।

विकास हुए, कसर बाकी
चुनावी मैदान के हालात के बाद अब बात विकास और मुद्दों की। मुरादाबाद शहर के बीच से गुजरें तो 667 मीटर लंबा लोकोशेड पुल विकास की गवाही देता है। मुरादाबाद से टिहरी तक छह लेन वाले हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण की कवायद भी चल रही है। गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भी जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है। वहीं, दिल्ली-बरेली हाईवे का चौड़ीकरण का काम चल रहा है। बिजनौर से दिल्ली एवं उत्तराखंड मार्ग का चौड़ीकरण भी होना है। गंगा नदी पर पुल बन गया है। पर, दूसरी ओर मंडल भर में रामगंगा नदी बरसात के महीने में आफत का सबब बनती है। तटबंधों की मांग इससे प्रभावित सभी जिलों में होती रही है। गंगा की कटान और बाढ़ बिजनौर क्षेत्र को प्रभावित करती रहती है। ढेला और फीका नदी का भी यही हाल है। वहीं, हवाई अड्डे से घरेलू उड़ानें शुरू नहीं हो पाई हैं। हालांकि, मार्च तक इसे शुरू करने के दावे हैं।
चुनौतियां बहुत हैं इस राह में

चुनाव में क्या मुद्दे अहम होंगे, इस सवाल पर वाणिज्य स्नातक अशफाक अली कहते हैं, सबसे बड़ा मुद्दा तो रोजगार ही होगा। वह दलील देते हैं कि युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। कोरोना के बाद हालत और खराब हो गई। प्रदेश में लोगों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ है। ऐसे में चुनाव में नौकरियों को लेकर सवाल तो उठेंगे ही। साफ है कि इससे सत्तारूढ़ पार्टी की चुनौतियां बढ़ेंगी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे विशाल चौधरी भी कहते हैं, किसान परेशान हैं तो युवाओं के सामने नौकरी का संकट है। इस बार विपक्ष के पास अच्छा अवसर है। वहीं छात्रा गुलफ्शां कहती हैं कि युवा, मजदूर खास तौर से पीतल भट्ठियों में काम करने वाले मजदूर परेशान हैं। इसका असर चुनाव में दिखेगा। पर, ऐसा नहीं है कि सारी आवाजें अशफाक और विशाल चौधरी जैसी ही हों। छात्र रजत कुमार कहते हैं, इस बार चुनाव में मुद्दे ही मुद्दे हैं। माना कि समस्याओं की फेहरिस्त कम नहीं है और विपक्ष इन सबको भुनाने की कोशिश अवश्य करेगा। पर, सरकार ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर अच्छा काम किया है। रजत की ही तरह छात्रा रागिनी चौहान कहती हैं, पिछले साढ़े चार साल में माहौल में फर्क आया है। कानून-व्यवस्था दुरुस्त हुई है। खासतौर से महिला सशक्तीकरण पर काम हुआ है। भाजपा को इसका चुनावी लाभ मिलेगा। 
 

रोजगार को लेकर चिंता

मुरादाबाद मंडल में कारोबारियों के अपने मुद्दे हैं। हालांकि चुनाव के सवाल पर वे बहुत नपी-तुली और संयत भाषा में जवाब देते हैं।  अमरोहा में ढोलक, जोया में मेंथा, बीड़ी उद्योग, हैंडलूम, काष्ठ कला व कताई जैसे धंधों से ज़ुड़े कारोबारियों का कहना है कि इन उद्योगों के लिए सरकारों को और काम करना चाहिए। ये सभी धंधे लगातार कम होते जा रहे हैं। रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। गन्ना बहुतायत होने के कारण किसान नई शुगर मिलें खोलने की मांग लगातार कर रहे हैं। कोसी नदी पर पुल और तिगरी मेले को और समृद्ध करने की मांगें लगातार होती रही हंै। हालांकि, बिजनौर में विदुर कुटी जैसे स्थान को नए रूप में विकसित कर सरकार ने पहल की है। 

निर्यात तो बढ़ा... पर कई मांगें अभी पूरी नहीं हुईं
मुरादाबाद से पीतल, तांबे के गिफ्ट एवं अन्य सजावटी सामानों का विश्व भर में निर्यात होता है। खासतौर पर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, मध्य पूर्व एशिया में मुरादाबाद की धाक है। 
कारोबारियों का कहना है कि पिछले पांच सालों में कारोबार तो बढ़ा, पर मुद्दे जस के तस हैं। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव अवधेश अग्रवाल कहते हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करने,  ईएसआई हॉस्पिटल की मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं।

रामपुर में मुद्दे अलग होंगे
इस मंडल में रामपुर एक ऐसा क्षेत्र है जो लगातार सुर्खियों में रहा है। यहां नौ बार विधानसभा चुनाव जीते आजम खां बाद में सांसद बने। उन पर मुकदमों की लंबी फेहरिस्त होना, जेल जाना, जांचें, जौहर विश्वविद्यालय की जमीन के मामले, भाजपा-सपा के लिए बड़ा मुद्दा है। तो वहीं आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम की स्वार सीट से विधायकी रद्द होना भी दोनों के लिए बड़ा मुद्दा है। सपा इस सबको उत्पीड़न के रूप में पेश करती है तो भाजपा इसे अपने तरीके से। बहरहाल, भाजपा सख्त कार्रवाई एवं आजम के सियासी किले को तोड़कर दूसरे पक्ष में अपना असर छोड़ने की कोशिश में है।

1993 से मुरादाबाद देहात सीट पर बंद है भाजपा का खाता
1957 में पहली बार अस्तित्व में आई मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट का अपना इतिहास रहा है। इस सीट पर हुए अब तक के 16 विधानसभा चुनावों में से 12 बार मुस्लिम विधायक जीते। 1993 में भाजपा को यहां से पहली बार सफलता मिली थी। अयोध्या लहर में सुरेश प्रताप सिंह चुनाव जीत गए थे। उसके बाद से भाजपा यहां जीत का स्वाद चखने के लिए तरस ही रही है।

सीटों का गणित

मुरादाबाद (6 सीटें)
मुरादाबाद : भाजपा के रितेश गुप्ता विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 2 लाख, वैश्य 65 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, सैनी 22 हजार, ब्राह्मण व क्षत्रिय 15-15 हजार। 
मुरादाबाद देहात : सपा के हाजी इकराम कुरेशी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 2.03 लाख, जाटव 28 हजार, सैनी 22 हजार, ब्राह्मण 13.5 हजार, वैश्य 12.5 हजार, पाल 12 हजार।
कुंदरकी : सपा के मोहम्मद रिजवान विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 2.20 लाख, अनुसूचित जातियां 54 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, सैनी 24 हजार, लोधी राजपूत 15 हजार, यादव 11 हजार।
बिलारी : सपा के मोहम्मद फईम विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.05 लाख, जाटव व अन्य अनुसूचित जातियां 85 हजार, यादव 40 हजार, जाट 20 हजार, क्षत्रिय 15 हजार, ब्राह्मण 8 हजार।
ठाकुरद्वारा : सपा के नवाबजान खां विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 70 हजार, क्षत्रिय व चौहान 60 हजार, जाटव 36 हजार, सैनी 30 हजार। 
कांठ : भाजपा के राजेश कुमार सिंह उर्फ चुन्नू विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.20 लाख, जाटव 40 हजार, जाट व विश्नोई 30 हजार, सैनी 28 हजार, चौहान 15 हजार, ब्राह्मण 10 हजार।

अमरोहा (4 सीटें)
अमरोहा : सपा के महबूब अली विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 1.80 लाख, सैनी 15 हजार, अनुसूचित जातियां 21 हजार, जाट 12 हजार, गुर्जर 8 हजार, वैश्य 7 हजार।
नौगांवा सादात : भाजपा की संगीता चौहान विधायक हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में क्रिकेटर चेतन चौहान भाजपा से जीते थे। उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी संगीता चौहान जीतीं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.25 लाख, अनुसूचित जातियां 50 हजार, जाट 40 हजार, क्षत्रिय 30 हजार, सैनी 22 हजार, पाल 15 हजार, गुर्जर 12 हजार, यादव 10 हजार।
हसनपुर : भाजपा से महेंद्र सिंह खड़गवंशी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 1.08 लाख, खड़गवंशी 90 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, सैनी 27 हजार, गुर्जर 24 हजार, प्रजापति 14 हजार, ब्राह्मण, त्यागी, यादव 7-7 हजार।
धनौरा (सु.) : भाजपा के राजीव तरारा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1 लाख, अनुसूचित जातियां 70 हजार, सैनी 40 हजार, जाट 35 हजार, प्रजापति 30 हजार, ब्राह्मण व गुर्जर 8-8 हजार।

रामपुर (5 सीटें)
रामपुर शहर : सपा से पूर्व मंत्री आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा विधायक हैं। सांसद बनने केबाद आजम खां ने यह सीट छोड़ी थी।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 80 हजार, वैश्य व लोधी 35-35 हजार, अनुसूचित जातियां 14 हजार, यादव 11 हजार।
बिलासपुर : भाजपा के बलदेव सिंह औलख विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  मुस्लिम करीब 70 हजार, कुर्मी 50 हजार, अनुसूचित जातियां 40 हजार, सिख 25 हजार, वैश्य 20 हजार, मौर्य और लोधी 15-15 हजार।
स्वार : फिलहाल यह सीट रिक्त है। यहां से मो. आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम खां सपा से जीते थे। बाद में उनकी आयु को लेकर सवाल खड़े हुए। हाईकोर्ट के आदेश पर दिसंबर 2019 में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उनका निर्वाचन रद्द कर दिया गया। चुनाव आयोग ने भी सीट को रिक्त घोषित कर दिया।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 1.81 लाख, सैनी 60 हजार, सिख 8 हजार व अन्य।
मिलक (सु.) : भाजपा की राजबाला विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 82 हजार, मुस्लिम 80 हजार, लोधी 72 हजार, यादव 25 हजार, कुर्मी 8 हजार।
चमरौआ : सपा के नसीर अहमद खां विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.70 लाख, लोधी 50 हजार, सैनी 21 हजार, सिख 10 हजार, पाल 6 हजार।

संभल (4 सीटें)
असमोली : सपा की पिंकी यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.25 लाख, यादव 72 हजार, अनुसूचित जातियां 55 हजार, सैनी 50 हजार और जाट 42 हजार। 
संभल : सपा के इकबाल महमूद विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 2.5 लाख, अनुसूचित   जातियां 48 हजार, जाट 9 हजार, यादव पांच हजार।
गुन्नौर : भाजपा के अजीत कुमार उर्फ राजू यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 1.80 लाख, मुस्लिम 55 हजार, जाटव 44 हजार, वैश्य 20 हजार।
चंदौसी (सु.) : भाजपा की गुलाब देवी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 85 हजार, जाटव, वाल्मीकि एवं अन्य अनुसूचित जातियां 80 हजार, वैश्य 35 हजार,  खागी 30 हजार, सैनी 25 हजार, क्षत्रिय 20 हजार, पाल 16 हजार, ब्राह्मण 15 हजार, यादव 12 हजार, प्रजापति 10 हजार।

बिजनौर (8 सीटें)
बिजनौर : भाजपा की सुचि चौधरी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.25 लाख, जाट व अनुसूचित जातियां 50-50 हजार, सैनी 35 हजार, पाल15 हजार, कश्यप13 हजार, क्षत्रिय व वैश्य 10-10 हजार।
नहटौर (सु.) : भाजपा के ओम कुमार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 80 हजार, अनुसूचित जातियां 70 हजार, चौहान व जाट 35-35 हजार, सैनी 30 हजार।
चांदपुर : भाजपा की कमलेश सैनी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.25 लाख, अनुसूचित जातियां 48 हजार, जाट 35 हजार, सैनी व चौहान 25-25 हजार।
बढ़ापुर : भाजपा के सुशांत राजपूत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब एक लाख, चौहान 65 हजार, अनुसूचित जाति 60 हजार, सैनी 21 हजार, कश्यप 13 हजार, जाट 10 हजार, पाल 9 हजार।
नगीना (सु.) : सपा के मनोज कुमार पारस विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.35 लाख, अनुसूचित जातियां 80 हजार, सैनी 35 हजार, जाट 25 हजार,  कश्यप 10 हजार, भूमिहार व चौहान 9-9 हजार।
नूरपुर : सपा के नईमुल हसन विधायक हैं। उप चुनाव में जीते थे।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब एक लाख, चौहान 32 हजार, अनुसूचित जातियां 30 हजार, सैनी17 हजार, जाट 15 हजार, यादव10 हजार।
धामपुर : भाजपा के अशोक राणा विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.20 लाख, चौहान 50 हजार, अनुसूचित जातियां 45 हजार, वैश्य 8 हजार, सिख व जाट12 हजार।
नजीबाबाद : सपा के तसलीम अहमद विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब एक लाख, अनुसूचित जातियां 50 हजार, जाट 30 हजार, वैश्य 8 हजार, रवा राजपूत 15 हजार, ब्राह्मण 8 हजार।
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