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राज्यपाल ने सराहा: लॉकडाउन में जन्मा बाल लेखक, महज 11 साल की उम्र में लिख डाली ‘वन एंड हॉफ ईयर’

जब हम सच्चाई या फिर कल्पना के करीब होते हैं, तब जन्म लेते हैं शब्द। डर-दहशत, खुशी-हंसी, प्रेम-नफरत जैसी संवेदनाएं जब हमें झकझोरती हैं तो सृजन या विध्व...

25 सितंबर 2021

Digital Edition

योगी मंत्रिमंडल का विस्तार: एक कैबिनेट और छह राज्य मंत्री शामिल, पांच महीने की मशक्कत के बाद चुने गए ये सात चेहरे

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार रविवार शाम हो गया। योगी मंत्रिमंडल में एक कैबिनेट मंत्री और छह राज्य मंत्रियों के रूप में सात नए चेहरों को शामिल किया गया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। बलरामपुर के विधायक पलटूराम, सोनभद्र के ओबरा से विधायक संजीव कुमार, गाजीपुर विधायक संगीता बिंद, मेरठ से विधायक दिनेश खटीक, आगरा से विधायक धर्मवीर प्रजापति और बरेली के बहेड़ी से विधायक छत्रपाल गंगवार को राज्यमंत्री के रूप शपथ ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा ने विधानसभा चुनाव-2022 में मिशन 350 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विधान परिषद में सदस्यों के मनोनयन से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार में अति पिछड़े, अति दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक समीकरण को साधा है।

प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद से ही योगी मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें शुरू हो गई थीं। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कई बार बैठकों का दौर चला। 23 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास पर हुई भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार पर सहमति बनी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के रविवार को लखनऊ लौटने के बाद शाम को मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम तय हो गया। रविवार शाम छह बजे राजभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह की मौजूदगी में  आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने एक कैबिनेट और छह राज्यमंत्रियों को शपथ ग्रहण कराई। मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक समरसता और संतुलन का खास ध्यान रखा गया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के एक दिन बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार में दीनदयाल के अंत्योदय के सपनों को साकार करते हुए खटीक, बिंद, प्रजापति जैसे अति पिछड़े और अति दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया है जिन्हें कभी अवसर नहीं मिला था।




क्षेत्रीय संतुलन बनाया
योगी आदित्यनाथ ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी टीम में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा है। मंत्रिमंडल विस्तार में पश्चिमी यूपी के शाहजहांपुर, आगरा, मेरठ और बरेली से एक-एक मंत्री बनाया गया है। जबकि पूर्वांचल के गाजीपुर, सोनभद्र और अवध के बलरामपुर से एक मंत्री बनाया गया है।

60 मंत्रियों की संख्या पूरी
प्रदेश सरकार के रविवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंत्रिमंडल के 60 सदस्यों की संख्या पूरी हो गई। योगी सरकार में अब 24 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, 27 राज्यमंत्री हैं।

22 अगस्त को हुआ था पहला विस्तार
योगी सरकार में मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 22 अगस्त 2019 को हुआ था। उसय समय मंत्रिमंडल की सदस्य संख्या 56 हुई थीं। उसमें 25 कैबिनेट, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 22 राज्यमंत्री थे। लेकिन बीते डेढ़ वर्ष में कोरोना संक्रमण से कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान, कमला रानी वरुण और राज्यमंत्री विजय कश्यप का निधन होने से तीन पद खाली हो गए थे।

मंत्रिमंडल में चार महिला बरकरार
योगी मंत्रिमंडल में चार महिला मंत्रियों की संख्या बरकरार रखी गई है। दिवंगत कमला रानी वरुण के निधन के बाद गाजीपुर विधायक डॉ. संगीता बलवंद बिंद को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। नीमिला कटियार, स्वाति सिंह और गुलाबदेवी पहले से मंत्रिमंडल में शामिल हैं।
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योगी मंत्रिमंडल में सात नए चेहरे शामिल योगी मंत्रिमंडल में सात नए चेहरे शामिल

UP Cabinet Expansion: ‘सात’ से सियासी चक्रव्यूह का सातवां द्वार भेदने की तैयारी, जातीय असंतुलन दूर करने पर ध्यान

विधानसभा चुनाव से करीब पांच माह पूर्व योगी सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में एक कैबिनेट मंत्री सहित सात नए चेहरों को शामिल कर भाजपा ने सात से 2022 के चुनावी समीकरण साधने और सियासी चक्रव्यूह का सातवां द्वार तोड़ने की कोशिश की है। सात में छह चेहरों का गैर यादव पिछड़ी और गैर जाटव अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति से चयन भाजपा के समग्र हिंदुत्व के समीकरण के संदेश को मजबूती दे रहा है। शोषित व वंचित वर्गों को सत्ता में भागीदारी देने का बड़ा सियासी संदेश भी है।

विस्तार के जरिए कोरोना काल में वर्तमान मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से उत्पन्न क्षेत्रीय व जातीय असंतुलन को दूर करने के साथ पश्चिम व पूर्वांचल के बीच भी संतुलन साधा गया है। यही नहीं, इसके जरिए पार्टी के कोर वोट के साथ नए वर्गों को भी साथ लाने का संदेश है। जिन लोगों को शपथ दिलाई गई है उनमें जितिन प्रसाद के रूप में एक अगड़ा (ब्राह्मण), तीन पिछड़े, दो अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति का चेहरा है। संजीव कुमार गोंड के रूप में अनुसूचित जनजाति के किसी चेहरे को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल करके न सिर्फ प्रदेश में जहां-तहां बसे वनवासी और आदिवासी जातियों को भाजपा के साथ लाने, बल्कि मिर्जापुर, सोनभद्र के साथ चित्रकूट के कुछ हिस्सों में इनके कारण मतदान पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान देते हुए सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। विस्तार में पश्चिम से चार व पूरब से तीन चेहरों को लेकर क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर भी ध्यान दिया गया है।
 
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एलान: योगी सरकार का बड़ा फैसला, गन्ने का समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाकर 350 रुपये प्रति क्विंटल किया

यूपी में विधान सभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों का इंतजार खत्म करते हुए गन्ना मूल्य में प्रति कुंतल 25 रुपये की बढ़ोत्तरी की घोषणा कर दी। भाजपा किसान मोर्चा के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि 315 रुपये प्रति कुंतल में बिकने वाले सामान्य गन्ना अब 340 रुपये में, 325 रुपये कुंतल बिकने वाला गन्ना 350 रुपये प्रतिकुंतल बिकेगा। अनउपयुक्त अगैती गन्ना के मूल्य में भी 25 रुपये कुंतल की वृद्धि होगी। उन्होंने दावा किया कि इससे गन्ना किसानों की आय में आठ फीसदी की वृद्धि होगी। उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री योगी ने वृंदावना योजना में आयोजित भाजपा किसान मोर्चा के सम्मेलन में कहा कि गन्ना मूल्य में वृद्धि से 45 लाख किसानों के जीवन में परिवर्तन होगा। 30 नवंबर तक गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा। इसके बाद फिर से मिलों को चलाया जाएगा। एकमुश्त योजना के माध्यम से किसानों का ब्याज माफ किया जाएगा। इसके लिए कमेटी बना दी गई है। जल्द ही ब्याज माफी के लिए ठोस योजना लाई जाएगी। जिससे किसानों को राहत मिलेगी। सीएम योगी कहा कि 2004 से 2014 के बीच का शासन सबने देखा होगा। प्रदेश और देश में वह अंधकार युग था। कोई सुरक्षित नहीं था। किसान आत्महत्या कर रहा था।

गरीब भूख से मर रहा था। जब केंद्र में हमारी सरकार आई तब बिना पीएम मोदी ने कहा हम  चेहरा देखकर नहीं, सबके लिए कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किया था। उनका कहना था कि जब धरती माता की सेहत का ध्यान रखेंगे तो हमें वैसा ही परिणाम मिलेगा। उप्र में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये ऋण माफ किया। उप्र में अन्नतदाता के चहरे पर खुशहाली आई है। किसान का अन्न सीधे क्रय केंद्रों पर खरीदता जा रहा है। आढ़तियों और बिचौलिया का इससे दखल हट गया है। सपा, बसपा, कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि उपज खरीदने की व्यवस्था उन्होंने क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने 29 लाख से अधिक किसानों का गेहूं खरीद कर 12408 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। जबकि हमारी सरकार ने 45.75 लाख से अधिक साढ़े चार साल में 36504 करोड़ से अधिक का गेहूं खरीद कर सीधे खाते में भुगतान किया हैं।

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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर अखिलेश ने महिलाओं से पूछीं समस्याएं : बोले-रोटी और बेटी की बात करने वाले कर रहे लाश पर राजनीति

लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के रास्ते आजमगढ़ जा रहे पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष का काफिला ग्रामीणों को देखकर रुक गया। वाहन से नीचे उतरे पूर्व मुख्यमंत्री ने महिलाओं से उनकी समस्याएं पूछीं। इस दौरान सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। कहा कि रोटी और बेटी की बात करने वाले आज सिर्फ लाश पर राजनीति कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव रविवार को निर्माणाधीन पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से लखनऊ से आजमगढ़ जा रहे थे।

जयसिंहपुर में लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो लोग सड़क पर आ गए। रास्ते में सपा के पूर्व विधायक अरुण वर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने सेमरी के पास अखिलेश का काफिला रोक लिया। वाहन से नीचे उतरे अखिलेश यादव का सपाइयों ने जोरदार स्वागत किया। पूर्व विधायक अरुण वर्मा का हाल पूछने के बाद उनका काफिला आगे बढ़ गया। थोड़ी दूर बाद खोजापुर (गोविंदपुर) गांव के पास पूर्व प्रधान व प्रधान प्रतिनिधि अनिलेश सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं को देखकर अखिलेश ने अपना काफिला फिर रुकवा लिया।

उन्होंने वाहन से उतर कर लोगों की समस्याओं को जाना। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के बारे में भी जानकारी ली। ग्रामीणों ने गांव के पास अंडरपास की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री ने अनिलेश सिंह से प्रस्ताव अपने पास भेजवाने को कहा। साथ ही उन्हें लखनऊ आकर मिलने का न्योता दिया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार भी कटाक्ष किया। कहा कि रोटी और बेटी की बात करने वाले आज सिर्फ लाश पर राजनीति कर रहे हैं। सरकार हर मुद्दे फर फेल है, सरकार की नाकामी ही आगामी चुनाव में सपा को पूर्ण बहुमत दिलाएगी।
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यूपी : प्रदेश में 82 महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी बनेंगी, लखनऊ को मिलेंगी पांच से अधिक चौकियां, भविष्य में महिला थाने में होंगी तब्दील

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर अखिलेश यादव
महिलाओं को सशक्त बनाने व महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम को लेकर मिशन शक्ति के तहत प्रदेश में 82 महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकियों की स्थापना की जा रही है। आईजी रेंज लखनऊ लक्ष्मी सिंह इसकी नोडल अधिकारी बनाई गई हैं। प्रदेश भर में स्थापित की जा रही रिपोर्टिंग चौकियों की देखरेख का जिम्मा आईजी लक्ष्मी सिंह को ही सौंपा गया है। इन चौकियों की स्थापना से प्रत्येक जिले में मौजूद एकमात्र महिला थाने पर न सिर्फ काम का दबाव कम होगा बल्कि पीड़ित महिलाओं की त्वरित सुनवाई होना भी सुनिश्चित होगा।

राजधानी में थाने तो 40 हैं मगर महिला थाना एक ही है। ऐसे में महिला थाने पर विवेचना के साथ-साथ काउंसिलिंग का भी दबाव रहता है। काम का दबाव अधिक होने के चलते अक्सर पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देरी होती है। ऐसी स्थिति में शहर के अलग-अलग हिस्से में पांच से ज्यादा महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी बनाई जाएंगी। इन चौकियों की मॉनीटरिंग वीमेन क्राइम एंड सेफ्टी सेल के प्रभारी की होगी। तीन तलाक, तलाक व दहेज उत्पीड़न के मामलों में अभी महिलाओं के पास सिर्फ उनके जिले का एकमात्र महिला थाना ही विकल्प है। मगर आमतौर पर शहर के बीच के इलाके में ही महिला थाना होने के चलते दूरदराज की महिलाओं को आने-जाने में दिक्कत होती है। ऐसे में अब जो महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकियां बनाई जाएंगी, वह जिले के उन इलाकों में होंगी जहां से महिला थाना का काफी दूर होगा।

प्रदेशभर में महिला अपराधों से संबंधित मामले बड़ी संख्या में लंबित होने के चलते एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने निर्णय लिया कि महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकियों की जल्द से जल्द स्थापना की जानी चाहिए। समिति ने हर जिले में दो महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकियां शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। भविष्य में इन चौकियों को महिला थाने में तब्दील किया जाएगा।

महिला थाने से होंगी संबद्ध
आईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकियों से काउंसिलर संबद्ध किए जाएंगे। ताकि तलाक के मामलों में तत्काल मध्यस्थता की आवश्यकता हो तो काउंसिलिंग के जरिए दोनों पक्षों को समझाकर घर टूटने से बचाया जा सके। इन चौकियों पर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा। चौकी पर ही महिला संबंधित अपराध और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों की एफआईआर दर्ज करने की भी सुविधा दी जाएगी। ये एफआईआर महिला थाने से अटैच होगी और महिला थाने की प्रभारी के साथ-साथ एसपी स्तर के अधिकारी इसकी मॉनीटरिंग करेंगे।

अभी प्रत्येक जिले में सिर्फ एक ही महिला थाना है। ऐसे में महिलाओं को न्याय मिलने में कहीं देरी न हो और महिला संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश के लिए पूरे प्रदेश में मिशन शक्ति के तहत 82 महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी बनाई जा रही हैं। राजधानी में पांच रिपोर्टिंग चौकियां बनाई जा रही हैं।
- लक्ष्मी सिंह, आईजी जोन लखनऊ
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यूपी : प्रदेश को मिली 812 नई एंबुलेंस, ट्रामा के मरीजों को मिलेगी राहत, प्रदेश में अभी चल रही हैं 2200 एंबुलेंस

प्रदेश के 108 एंबुलेंस बेड़े में 812 नई एंबुलेंस शामिल होंगी। नई एंबुलेंस के आने से दुर्घटना के बाद एंबुलेंस के पहुंचने के वक्त को कम करने की तैयारी है। प्रदेश में अभी 108 एंबुलेंस के बेडे़ में करीब 2200 वाहन हैं। दुर्घटना होने पर एंबुलेंस के मौके पर पहुंचने का वक्त 15 मिनट निर्धारित किया गया है। अब इस बेडे़ में 812 नई एंबुलेंस शामिल की जा रही है। इसके लिए एक अरब 30 करोड़ 12 हजार रुपया खर्च किया जा रहा है। 

इस संबंध में शासन सचिव अपर्णा यू ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र भेजा है। इसमें निर्देश दिया गया कि नई एंबुलेंस की खरीद होने के बाद धीरे-धीरे पुरानी और लाइफ ओवर हो चुकी एंबुलेंस को हटा दिया जाए। फिलहाल नई एंबुलेंस मिलने के बाद रिस्पॉस टाइम (मौके पर पहुंचने का समय) भी घटाने की कवायद की जाएगी। इसे 15 मिनट से घटाकर 10 मिनट पर लाने की तैयारी है।

जीवीके चलाती है 108
प्रदेश में 108 एंबुलेंस और एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का संचालन जीवीके ईएमआरआई कर रही थी। लेकिन छह माह पहले एएलएस के संचालन की जिम्मेदारी जिकित्सा हेल्थ केयर को दी गई है। जबकि साधारण एंबुलेंस को जीवीके चला रही है।
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यूपी मंत्रिमंडल विस्तार: मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं जितिन प्रसाद, अब योगी मंत्रिमंडल में शामिल

यूपी में ब्राह्मण नेता के रूप में पहचान रखने वाले जितिन प्रसाद रविवार शाम शपथ लेने के बाद योगी के मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। बता दें कि वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वह बीते नौ जून को कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।

अपने कांग्रेस छोड़ने पर जितिन ने कहा था कि मैंने पिछले 8-10 सालों में यह महसूस किया है कि आज देश में अगर कोई असली मायने में संस्थागत राजनीतिक दल है तो भाजपा है। बाकी दल तो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए, लेकिन राष्ट्रीय दल के नाम पर भारत में कोई दल है तो भाजपा है। उन्होंने कहा कि हमारा देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उसके लिए आज देशहित में कोई दल और कोई नेता सबसे उपयुक्त और मजबूती से खड़ा है, तो वो भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

 उन्होंने कहा था कि कांग्रेस अब एक व्यक्ति विशेष और वर्ग विशेष की पार्टी रह गई है। इस वजह से काम नहीं कर पा रहा था। बता दें कि जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में सक्रिय नेतृत्व और संगठनात्मक चुनाव की मांग को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने पार्टी में बड़े बदलाव की मांग की थी।
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बड़ा दांव: यूपी में आज शाम मंत्रिमंडल विस्तार, ब्राह्मण-दलित समीकरण से विधानसभा चुनाव साधने की कोशिश

यूपी में करीब चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आज शाम को कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद सहित सात मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। जितिन के अलावा, मंत्री पद की शपथ लेने वालों में पलटू राम, संजीव कुमार, संगीता बिंद, दिनेश खटिक, धर्मवीर प्रजापति और छत्रपाल गंगवार शामिल हैं।

दरअसल, चार महीने बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार को काफी अहम माना जा रहा है। यह लंबे समय से प्रतीक्षित था।

बता दें कि आठ जुलाई को हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में यूपी को खास तवज्जो दी गई थी। जिसमें जातीय गणित पर साधने का प्रयास किया गया था। यूपी से बनाए गए सात नए मंत्रियों में चार ओबीसी, दो दलित और एक ब्राह्मण समाज के थे। मोदी के कैबिनेट में यूपी का मजबूत प्रतिनिधित्व है। यह पहली बार है जब केंद्रीय कैबिनेट में यूपी से रिकॉर्ड 15 मंत्री बनाए गए हैं।

भाजपा यूपी चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। पार्टी ने बूथों को मजबूत करने का अभियान शुरू कर दिया है। वहीं, चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी यूपी में तीन दिन प्रवास किया और चुनावी तैयारियों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि 2022 के चुनाव में भाजपा यूपी में 350 सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। वहीं, सपा ने 400 विधानसभा सीटें जीतने की बात कही है।

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मुख्यमंत्री योगी का कहना है कि पिछले साढ़े चार साल के भाजपा कार्यकाल में यूपी विकास के पथ पर आगे बढ़ा है। अब प्रदेश में निवेश का माहौल बना है और प्रदेश को भ्रष्टाचार व खराब कानून व्यवस्था से राहत मिली है। जनता एक बार फिर भाजपा की सरकार बनवाएगी।

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यूपी : नौ महीने पहले प्रमोशन पाए आइ आईपीएस अधिकारियों को दी गई तैनाती, सांसद की पिटाई मामले में सीओ निलंबित

नौ महीने पहले प्रमोशन पाए आधा दर्जन से अधिक आईपीएस अफसरों को उम्मीद थी कि उन्हें किसी नए पद पर काम करने का मौका मिलेगा। लेकिन लंबे इंतजार के बाद शनिवार देर रात तबादलों का इंतजार कर रहे 8 में से 7 अधिकारियों को शासन ने उसी जगह पर तैनाती दे दी गई है।
    
शासन की ओर से आधी रात को जारी आठ आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची के मुताबिक एडीजी रैंक के अधिकारियों में विजय प्रकाश को फायर सर्विसेज में ही एडीजी के पद पर तैनाती दी गई है। वह पहले यहीं आईजी के पद पर तैनात थे। एसटीएफ में तैनात अमिताभ यश को वहीं आईजी से एडीजी एसटीएफ बना दिया गया है। नवनीत सिकेरा को पुलिस मुख्यालय से भवन एवं कल्याण का एडीजी बना दिया गया है।
    
आईजी रैंक के अधिकारियों में अभियोजन में डीआईजी के रूप में तैनात विनय कुमार यादव को वहीं आईजी के रूप में तैनाती दे दी गई है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन में डीआईजी के रूप में तैनात हीरा लाल को वहीं आईजी बना दिया गया है। पीटीसी मुरादाबाद में डीआईजी के रूप में तैनात शिव शंकर सिंह को वहीं आईजी बनाया गया है। इसी तरह 1 जनवरी को एसपी से डीआईजी बने रवि शंकर छवि को वूमन पावर लाइन में ही डीआईजी के पद पर तैनाती दी गई है। वह यहीं पर एसपी के रूप में काम कर रहे थे। इसी तरह तकनीकी सेवा में एसपी के रूप में तैनात प्रतिभा अंबेडकर को तकनीकी सेवा में ही डीआईजी के पद पर तैनाती दी गई है।


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