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गद्दार कौन: सिंधिया-दिग्विजय की जुबानी जंग में मिश्रा भी कूदे, कहा- देश के गद्दारों को किसी को गद्दार कहने का अधिकार नहीं

गद्दार शब्द को लेकर केंद्रीय ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह में जुबानी जंग छिड़ी हुई है। दिग्विजय के करीबी नेता को भाजपा में शामिल करने पर सिंधिया निशाने पर आए थे। इस पर दिग्विजय सिंह ने उन्हें गद्दार कहा था। इस मसले पर प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे, तो देवता समान थे। जब मैदान में आ गए तो हरजाई हो गए। दिग्विजय सिंह जी को यह सोचना चाहिए। टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थक देश के गद्दार हैं। देश के गद्दारों को किसी और को गद्दार कहने का अधिकार नहीं है। ये सब जयचंदों की जमात है। 



पंचायत चुनावों पर कांग्रेस का विरोध  नाजायज
प्रदेश में पंचायत चुनावों की घोषणा हो गई है। इसके बाद भी कांग्रेस परिसीमन संबंधी कानून को लेकर विरोध कर रही है। इस पर मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस का संगठन अब समाप्ति की ओर है। ऐसे में हर चुनाव से पहले कांग्रेस पलायन करती है। कांग्रेस को एक और हार का डर सता रहा है। इसी वजह से पंचायत चुनाव का विरोध कर रही है। चुनाव हो रहा है तो चुनाव लड़ें, भाग क्यों रहे हैं। कांग्रेस उहापोह में क्यों है? जनता के बीच चलिए, कहीं जाने की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में चुनाव एक कसौटी होता है। अपनी-अपनी विश्वसनीयता साबित करने का मौका है। जनता से उस पर मुहर लगवाओ। ये लोग पहले 28 चुनाव हारे। तीन उपचुनाव हारकर बैठे हैं। उन्हें पता है कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस का क्या होगा। उनकी रटी-रटाई स्क्रिप्ट है। नतीजे आने तक कहते हैं कि भाजपा हार रही है। कांग्रेस जीत रही है। फिर कहते हैं कि भाजपा ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर जीत हासिल की है। 

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मध्य प्रदेश: फारुक अब्दुल्ला धारा 370 को बहाल करने की बात कहकर अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारुक अब्दुल्ला पर हमला बोला है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि धारा 370 की बहाली की बात करते हुए फारुक अब्दुल्ला लोगों को भड़का रहे हैं। देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों विरोध के बीच तीनों कृषि कानून वापस लिए थे। इससे जम्मू-कश्मीर के नेताओं में भी उम्मीद जगी है कि एक न एक दिन धारा 370 फिर लागू हो सकती है। फारुक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा था कि जिस प्रकार 700 किसानों के बलिदान के बाद केंद्र को कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा, उसी प्रकार हमें अपने अधिकारों को वापस पाने के लिए ‘बलिदान देने’ को तैयार रहना पड़ेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि फारुक अब्दुल्ला धारा 370 को बहाल करने का बयान देकर लोगों को उकसाने काम काम कर रहे हैं। उनके ऐसे बयानों से जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं होने वाला है। ये वही लोग है जिन्होंने नागरिकता कानून पर दिल्ली में धरना दिलवाया था। बिरयानी भेजी थी। इनके बयानों से 370 नहीं हट रही है।
  
 
 
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मध्य प्रदेश: गद्दार कहने पर सिंधिया का दिग्विजय पर पलटवार, कहा- मैं उनके स्तर तक नहीं गिरना चाहता

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शनिवार को सिंधिया ने गुना में सिंह के करीबी रहे हीरेन्द्र सिंह सहित कई कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल कराया था। इस पर दिग्विजय सिंह ने सिंधिया पर हमला बोलते हुए उन्हें गद्दार कहा था। अशोकनगर में रोड शो के बाद सिंधिया ने इस पर कहा कि मैं उनके स्तर पर गिरकर बात नहीं कर सकता।  

सिंधिया ने कहा कि दिग्विजय सिंह एक वरिष्ठ नेता हैं। जो व्यक्ति ओसामा को ओसामा जी कहे, जो कहे कि सरकार कांग्रेस की आएगी तो धारा 370 हटाएंगे, ऐसे दिग्विजय सिंह से क्या कहा जाए?  इस तरह के बयान देना उनकी आदत रही है। मैं उनकी असलियत सामने नहीं लाना चाहता। न ही उनकी तरह नीचे गिरना चाहता हूं। जरूर, उन्हें किसी बात से दुख पहुंचा है, जिसकी वजह से वे इतने गंभीर और वरिष्ठ नेता होने के बावजूद इस स्तर पर आकर बयान दे रहे हैं। दिग्विजय सिंह के उकसाने के बावजूद वे सिंधिया परिवार की मर्यादा को बनाए रखेंगे। 
 
कांटे का क्या मतलब है?
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांटा शब्द का इस्तेमाल हीरेन्द्र सिंह के भाजपा में शामिल होने की बात पर कही। इसके बाद ही दिग्विजय सिंह भड़के थे। दिग्विजय ने शनिवार को ही एक रैली में कहा था कि सिंधिया ने पहले कांग्रेस का फायदा उठाया और फिर बीजेपी में चले गए। सिंधिया ने 25-25 करोड़ रुपये देकर कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा। इतिहास गद्दारों को कभी माफ नहीं करता है। पीढ़ियां इनकी गद्दारी याद रखेंगी। जब भी झांसी की रानी महारानी लक्ष्मीबाई का नाम आता है तो सिंधिया परिवार का नाम याद आता है या नहीं। अगर पानीपत के युद्ध में सिंधिया राजाओं ने हिंदू राजाओं का साथ दिया होता तो पानीपत की लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली की हार होती। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अगर गद्दारी नहीं की होती तो मध्य प्रदेश में आज कांग्रेस की सरकार होती। 
 
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मध्य प्रदेश: कोरोना की तैयारी बताएं शिवराज सरकार, उसने तो जनता को भगवान भरोसे छोड़ा: कमलनाथ 

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने कोरोना की संभावित तीसरी लहर पर शिवराज सिंह चौहान सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नया वैरिएंट दस्तक दे चुका है। ऐसे में सरकार को जनता को बताना चाहिए कि उसने क्या तैयारी की है। 

कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर कहा कि "प्रदेश की शिवराज सरकार चुनावी एजेंडा के तहत नामकरण की राजनीति, इवेंट, मेगा शो, आयोजन, उत्सव, जश्न से यदि फ्री हो चुकी है तो जनता को बताए कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए उसने क्या तैयारियां और इंतजाम किए हैं? देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका लगातार व्यक्त की जा रही है। कोरोना संक्रमण के मामले निरंतर बढ़ रहे हैं। नए वैरिएंट की दस्तक हो चुकी है। सरकार बताए कि प्रदेश में सरकार ने इलाज, बेड, अस्पताल, ऑक्सीजन, जीवनरक्षक दवाओं की क्या व्यवस्था की है?

कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में बेड की कितनी उपलब्धता है? अभी तक कितने बेड बढ़ाए हैं? कितने वेंटिलेटर की व्यवस्था की है? कितने आईसीयू बेड बढ़ाए हैं? ऑक्सीजन की आपूर्ति की क्या व्यवस्था है? अभी वर्तमान में कितनी उपलब्धता है? भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप क्या व्यवस्था की गई है? जीवनरक्षक दवाओं व इंजेक्शन की वर्तमान में कितनी उपलब्धता है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसकी आपूर्ति को लेकर क्या व्यवस्था की गई है? 

भगवान भरोसे छोड़ा सरकार ने 
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता ने कोरोना की दूसरी लहर में शिवराज सरकार का कुप्रबंधन खुली आंखों से देखा है। लाखों लोगों की मौत इलाज, बेड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन के अभाव में हो चुकी है। प्रदेश की जनता को सरकार ने भगवान भरोसे छोड़ दिया था। लाखों लोग उसका दर्द आज भी भोग रहे हैं। अब सिर्फ संदेश वाचन से काम नहीं चलेगा। सरकार को अपनी तैयारियों व वर्तमान स्थिति की जानकारी प्रदेश की जनता के सामने रखना चाहिए। 
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कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो) कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश: जाकिर नाइक को शांतिदूत कहने वाले दिग्विजय सिंह के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जाकिर नाइक को शांतिदूत कहने वाले दिग्विजय सिंह के प्रमाण पत्र की मुझे कोई जरूरत नहीं है। उनकी सोच संकुचित है। 

नियमित प्रेस ब्रीफिंग में डॉ. मिश्रा से पूछा गया था कि दिग्विजय सिंह बजरंग दल और सरकार को सांप्रदायिक कह रहे हैं। इस पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि जाकिर नाइक को शांतिदूत कहने वाले आदरणीय दिग्विजय सिंह हम पर क्या आरोप लगाएंगे? वे क्या बजरंग दल को सांप्रदायिक कहेंगे? उनकी सोच संकुचित है। मुझे ध्यान है कि जब यहां पर गदर फिल्म का गदर हुआ था। हमारे कांस्टेबल मोती सिंह का हाथ काट दिया गया था। उस कैंडिडेट को जिताते हुए घूमे हैं। वो सांप्रदायिकता सौहार्द्र की बात क्या करेंगे? हम पर क्या आरोप लगाएंगे? हम कैसे हैं, जो मिले हैं उन्होंने ट्वीट किया है। दिग्विजय सिंह के प्रमाण पत्र की मुझे जरूरत नहीं है। 
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Bhopal: सेज ग्रुप पर आयकर छापे, भोपाल-इंदौर में कई ठिकानों पर एक साथ पहुंचे अधिकारी 

मध्य प्रदेश में शिक्षा और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेज (Sage) ग्रुप पर आयकर विभाग ने छापा मारा है। ग्रुप पर कर चोरी के आरोप हैं। आयकर विभाग की टीमों ने इंदौर-भोपाल में एक साथ कार्यवाही की। दोनों ही जगह ग्रुप की सेज यूनिवर्सिटी है। इसके साथ-साथ ग्रुप कई स्कूलों का संचालन भी करता है। 

भोपाल के एमपी नगर में सेज ग्रुप का मुख्य ऑफिस है। यहां चार गाड़ियों में बैठकर अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे थे। छापे की कार्यवाही के दौरान पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी को भी अंदर-बाहर जाने नहीं दिया जा रहा। अब तक की कार्यवाही में क्या मिला है, यह जानकारी अपडेट हो रही है। अरेरा कॉलोनी में ग्रुप के कर्ता-धर्ताओं के निवास पर भी कार्यवाही की जा रही है। बताया जाता है कि 10 साल पहले भी इस ग्रुप पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था। 

मुख्य रूप से बिल्डर 
सेज यूनिवर्सिटी के साथ-साथ सेज इंटरनेशनल नाम से स्कूलों का संचालन भी यह ग्रुप कर रहा है। साथ ही भोपाल में कई आवासीय और व्यावयासिक प्रोजेक्ट भी ग्रुप ने विकसित किए हैं। सेज ग्रुप की वेबसाइट के मुताबिक अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी, सेज यूनिवर्सिटी-भोपाल और इंदौर, सेज इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी, सेज इंटरनेशनल स्कूल, अग्रवाल पॉवर कंपनी लिमिटेड और माय सेज हॉस्पिटल का संचालन ग्रुप कर रहा है। कुल मिलाकर ग्रुप के 5 कॉलेज और 2 स्कूल है।  ग्रुप के मुखिया संजय अग्रवाल के घर पर भी छापा मारा गया है। 
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Bhopal Murder Case: प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की, शव ठिकाने नहीं लगा सके तो साथ लेकर थाने पहुंचे

सेज ग्रुप के अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी पर तैनात पुलिसकर्मी।
भोपाल में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतारा। उसका चेहरा बिगाड़ा, ताकि लाश को ठिकाने लगाया जाए तो उसकी शिनाख्त न हो सके। छह घंटे बाद महिला लाश लेकर अपने प्रेमी के साथ थाने पहुंच गई। वहां दावा किया कि अगर हम नहीं मारते तो पति उन दोनों को खत्म कर देता। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीहोर निवासी धनराज मीणा की पत्नी संगीता ने अपने प्रेमी आशीष पांडे के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। धनराज मीणा अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सागर गोल्डन पाम में रहता था। 2021 में लॉकडाउन के दौरान पास ही रहने वाले आशीष से उसकी दोस्ती हुई। आशीष का घर में आना-जाना बढ़ा तो वह संगीता के नजदीक आ गया। आठ महीने पहले धनराज ने आशीष को अपने घर के बेडरूम में देखा था। तब से वह संगीता पर शक करने लगा था। धनराज ने संगीता पर नजर रखना शुरू की। संगीता ने पुलिस को बताया कि धनराज शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता था। 

नींद की गोलियां खिलाकर गला घोंटा
संगीता ने धनराज को 10 नींद की गोलियां खिलाई थी। जब उसे नींद लग गई तो आशीष के साथ मिलकर उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। हथौड़ी, डंडे और लाठी से उस पर इतने वार किए कि उसका चेहरा ही बिगड़ गया। आशीष पांडे ने आईटीएम ग्वालियर से पढ़ाई की है। वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वह भी शादीशुदा है और पत्नी को नाइट शिफ्ट का कहकर घर से निकला था।   
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MP Panchayat Chunav: पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई 9 दिसंबर को 

पंचायत चुनावों पर राज्य सरकार के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट अब 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच से याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। इस पर निर्देश जारी किए गए हैं। 

भोपाल के मनमोहन नायर और गाडरवारा के संदीप पटेल ने अलग-अलग याचिकाओं में प्रदेश में तीन चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को चुनौती दी है। इस याचिका में मप्र सरकार की ओर से हाल ही में जारी अध्यादेश को भी चुनौती दी गई है। इस अध्यादेश के जरिए कमलनाथ सरकार के समय तय पंचायत चुनाव प्रक्रिया को पलटते हुए पुराने परिसीमन के आधार पर चुनाव कराने की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि मप्र सरकार का अध्यादेश कांग्रेस पंचायत चुनाव अधिनियम का उल्लंघन करता है। इस वजह से इसे रद्द किया जाए। 

याचिका में यह भी कहा गया है कि पंचायत एक्ट में रोटेशन व्यवस्था का प्रावधान है। पहले की तरह आरक्षण करना पंचायत एक्ट के रोटेशन की व्यवस्था के खिलाफ है। इसके अलावा 2018 में निवाड़ी जिला बना है। बिना सीमांकन किए नए जिले में पंचायत चुनाव नहीं करवाए जा सकते। दोनों याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।  

हाईकोर्ट में क्यों है यह मामला? 
शिवराज सिंह चौहान सरकार ने पिछले दिनों पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश 2021 को मंजूरी दी थी। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई थी। इसके अनुसार जहां एक साल से चुनाव नहीं हुए हैं, ऐसी पंचायतों के परिसीमन को निरस्त कर दिया गया है। इन जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों में पुरानी ही व्यवस्था रहेगी। यानी आरक्षण व्यवस्था में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। जो जैसा था, वैसा ही रहेगा। कमलनाथ सरकार ने सितंबर 2019 में प्रदेश में जिले से ग्राम पंचायतों तक नया परिसीमन लागू किया था। इसके बाद 1,200 नई पंचायतें बनी थीं। 102 ग्राम पंचायतों को समाप्त कर दिया था। 1,950 पंचायतों की सीमा में बदलाव हुए थे। याचिकाओं में इसी अध्यादेश को चुनौती दी गई है। 

कब होंगे पंचायत चुनाव? 
पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों की तारीखें घोषित की थी। 6 जनवरी को पहले चरण, 28 जनवरी को दूसरे चरण और 16 फरवरी 2022 को तीसरे चरण का मतदान होगा। 9 जिलों में एक चरण में, 7 जिलों में दो चरणों में और 36 जिलों में तीन चरणों में चुनाव होंगे। प्रदेश में 3.92 करोड़ मतदाता है, जो पंचायत चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 4.25 लाख कर्मचारी यह चुनाव कराएंगे। 52 जिलों में 859 जिला पंचायत सदस्य, 313 जनपदों के 6,727 जनपद पंचायत सदस्य, 22 हजार 581 सरपंच, 3 लाख 62 हजार 754 पंचों का चुनाव होगा। 114 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मार्च 2022 के बाद पूरा होगा, इस वजह से उनके चुनाव बाद में किए जाएंगे।  
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मध्य प्रदेश: देशविरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा बन चुका है जेएनयू

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मैंने भी यह नारे सुने हैं। यह पीड़ादायी है। यह देशविरोधी क्रोनोलॉजी है, जो सक्रिय हो गई है। टुकड़े-टुकड़े गैंग फिर से देश में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। 

डॉ. मिश्रा ने सोशल प्लेटफॉर्म कू पर पोस्ट किए अपने वीडियो में कहा कि "आपने फारुक अब्दुल्ला का बयान पढ़ा होगा। उसके बाद सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी की राय भी पढ़ी होगी। टुकड़े-टुकड़े गैंग फिर से देश का माहौल खराब करने की कोशिश में लगी है। जेएनयू देशविरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा बन गया है। सरकार की और जनता की गाढ़ी कमाई पर फ्री में पढ़ाई हो रही है। इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय राम जन्मभूमि पर आया था। उसके बाद यह नारे लगाए गए हैं। कभी देश के टुकड़े-टुकड़े की बात करते हैं। कभी चीन का स्वागत करते हैं। पाकिस्तान में 90% हड्डियां तोड़ दी गई, उस पर तो कोई कुछ नहीं बोला। ये कम्युनिज्म सोच का अड्डा बन गया है।"
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MP Cabinet Decisions: ग्वालियर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 57 हैक्टेयर जमीन देने के फैसले पर कैबिनेट की मुहर

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने ग्वालियर के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट के विस्तार और नए एयर टर्मिनल को बनाने के लिए राज्य सरकार ने 57 हैक्टेयर जमीन 1 रुपये की लीज पर देने का फैसला किया है। इसके साथ ही जंगलों से विस्थापित होने वाले परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को बढ़ाकर 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया है। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे महत्वपूर्ण फैसला ग्वालियर के एयरपोर्ट विस्तार को लेकर था। बैठक के बाद प्रदेश के गृह मंत्री और सरकार के प्रवक्ता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि ग्वालियर में एयरपोर्ट को विस्तार देने के लिए 57 हैक्टेयर जमीन 1 रुपये की लीज पर देने का फैसला किया गया है। यह ग्वालियर एयरपोर्ट को विस्तार देने में महती भूमिका निभाएगा। इससे नई फ्लाइट्स शुरू करने और सुविधाएं बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के प्रयासों से आलू अनुसंधान केंद्र की 110 एकड़ जमीन एयरपोर्ट के लिए आवंटित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी हुआ था। इन फैसलों से ग्वालियर एयरपोर्ट के विस्तार की योजनाओं को लागू करने में गति मिलेगी।   
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मध्य प्रदेश: तीसरी लहर से निपटने के लिए सरकार की दोतरफा रणनीति- अस्पतालों को तैयार करेंगे, वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाएंगे

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि ज्यादातर आकलन कह रहे हैं कि कोरोना की तीसरी लहर जनवरी में आ सकती है। भगवान करें कि ऐसा न हो। इसके बाद भी हमें दो स्तरों पर तैयार रहना होगा। पहले तो अस्पतालों समेत जरूरी संसाधनों को तैयार रखना होगा। इसके साथ ही कोविड-19 वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ानी होगी। हम अच्छी स्थिति में है, पर जागरुकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। 

मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक से पहले चौहान ने कहा कि हम बेहतर स्थिति में है। ओमिक्रॉन की वजह से तीसरी लहर आ सकती है। अब तक जो पता चला है कि यह ज्यादा गंभीर नहीं है। मामूली सर्दी-जुकाम ही होता है। इसके बाद भी तैयारी रखनी होगी। हमें अस्पतालों को तैयार रखना होगा। सभी मंत्री अगले हफ्ते अपने प्रभार वाले जिलों में अस्पतालों का निरीक्षण सुनिश्चित करें। मैंने भी एक दिन पहले ही समीक्षा की थी। आप लोग भी सक्रिय रहे, ताकि आपके प्रभार वाले जिलों में ढिलाई न बरती जाए। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बुधवार को वैक्सीनेशन का महाभियान है। इसके लिए मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिले में सक्रिय रहे। किसी न किसी वैक्सीनेशन सेंटर पर जरूर विजिट करें। साथ ही जनप्रतिनिधियों, डॉक्टरों आदि के जरिए जागरुकता बढ़ाने की कोशिश करें। हम वैक्सीनेशन में 70 प्रतिशत से अधिक पर पहुंच चुके हैं। अच्छी स्थिति में है। कोशिश करना है कि दिसंबर में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पूरी तरह वैक्सीनेट कर दिया जाए। इससे कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाव मिल जाता है। यह हमें और बेहतर स्थिति में ला देगा। 
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Covid-19 update: कोरोना की तीसरी लहर और लॉकडाउन के डर से छतरपुर में व्यापारी ने खाया जहर!

छोटे व्यापारियों के लिए कोविड-19 और उसे रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन जानलेवा साबित हो रहे हैं। अभी तीसरी लहर की आशंका से व्यापारी दहशत में हैं। संभावित लॉकडाउन ने उनमें भविष्य को लेकर डर बिठा दिया है। मध्य प्रदेश के छतरपुर में ऐसे ही एक व्यापारी ने डर और नुकसान की आशंका को देखते हुए जान देने की कोशिश की है। 

मामला छतरपुर जिले के मातगुवा थाना क्षेत्र का है। खड़गांय निवासी कपड़ा व्यापारी अंशुल शर्मा पिता विनय शर्मा ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की है। जिला अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। फिलहाल वह ठीक है। अंशुल का कहना है कि वह गांव में कपड़े की दुकान लगाता है। साथ ही हाट-बाजार और अन्य गांवों में भी बाजार करने जाता है। कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर और लॉकडाउन ने उसे काफी घाटा और नुकसान पहुंचाया है। ऊपर से तीसरी लहर और लॉकडाउन का डर बढ़ गया है। इन हालातों ने धंधे की कमर तोड़कर रख दी है। तीसरी लहर की सुगबुगाहट सुनकर वह दहशत में आ गया था। इस वजह से उसने सुसाइड करने के उद्देश्य से घर में रखी चूहा मार दवाई खा ली थी।

दो माह की बेटी की परवरिश की चिंता 
अंशुल की दो साल पहले मंजूलता से शादी हुई थी। उसकी दो माह की एक बेटी भी है। अब तक हुए नुकसान और बच्ची की परवरिश की चिंता ने उसको अंदर से हिला दिया है। उसे समझ नहीं आ रहा कि लगातार हो रहे नुकसान की भरपाई कैसे होगी। अब आने वाली आफत उसे जीवनभर उबरने नहीं देगी। इसके डर से उसने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया। 
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