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ये चार राशि के लोग हो जाएं सावधान, कष्टकारी रहेगा शनिवार
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मध्यप्रदेश: इंदौर के अस्पताल में 20 दिन के भीतर ब्लैक फंगस के 32 मरीजों ने तोड़ा दम

मध्यप्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) कहर बनकर टूट रहा है। इंदौर जिले में ब्लैक फंगस के ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) में पिछले 20 दिनों के भीतर इस बीमारी के 32 मरीजों की मौत हो गई। एमवायएच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। एमवायएच, राज्य में ब्लैक फंगस का इलाज करने वाला सबसे व्यस्त अस्पताल है जहां इंदौर के अलावा अन्य जिलों के मरीज भी भर्ती हैं।

एमवायएच के अधीक्षक प्रमेंद्र ठाकुर ने बताया, "हमारे अस्पताल में ब्लैक फंगस का पहला मरीज 13 मई को भर्ती हुआ था और अब तक इसके कुल 439 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 84 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 32 मरीजों की मौत हो चुकी।" अधीक्षक ठाकुर ने बताया कि एमवायएच में ब्लैक फंगस के मरीजों की वर्तमान मृत्यु दर 7.29 प्रतिशत है। हालांकि, यह दर राज्य के अन्य अस्पतालों के मुकाबले कम है।

अस्पताल में 200 मरीजों की सर्जरी
एमवायएच अधीक्षक ने बताया, "हम ब्लैक फंगस के मरीजों की जान बचाने के लिए पिछले 20 दिनों में 200 से ज्यादा लोगों की सर्जरी कर चुके हैं।" एमवायएच में फिलहाल ब्लैक फंगस के 323 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 14 लोग कोविड-19 से संक्रमित हैं, जबकि 301 व्यक्तियों में इस महामारी से उबरने के बाद ब्लैक फंगस की समस्या उत्पन्न हुई है। ब्लैक फंगस के आठ अन्य मरीजों को कोविड-19 होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

राज्य में इंदौर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला
गौरतलब है कि इंदौर, मध्य प्रदेश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35 लाख की आबादी वाले जिले में 24 मार्च 2020 से लेकर अब तक महामारी के कुल 1,50,516 मरीज मिले हैं। इनमें से 1,347 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई।

सूबे में पॉजिटिविटी रेट 5 फीसदी से कम
मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में पॉजिटिविटी रेट 5 फीसदी से नीचे आ गया है। सूबे में एक्टिव केसों की संख्या 20,000 से भी कम हो गई है। राज्य में अब तक कोरोना के 7.80 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 7.5 लाख से ज्यादा लोग स्वस्थ हो चुके हैं। हालांकि 8,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राज्य में अब तक 1,11,67,304 वैक्सीन डोज भी लग चुकी हैं।
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मध्यप्रदेश: शाजापुर में सरकारी बीज दुकान पर अचानक जुटे सैकड़ों किसान, मच गई भगदड़ की स्थिति

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन जारी है, लेकिन लगातार कम हो रहे मामले को देखते हुए सरकार ने 1 जून से कुछ छूट दी है। छूट में आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को खोल दिया गया है। हालांकि इस दौरान मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन शाजापुर से ऐसी तस्वीरें आई हैं कि वहां पर लॉकडाउन नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। 

बुधवार को शाजापुर में बीज निगम गोदाम के बाहर सोयाबीन बीज लेने के लिए बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। इस दौरान वहां पर भगदड़ मच गई। समाचार एजेंसी एएनआई ने कुछ तस्वीरें साझा की है, जिसमें कुछ लोग मास्क तो लगाए हुए हैं, लेकिन 2 गज की दूरी बनाकर नहीं खड़े हैं, बल्कि लोग एक दूसरे के पास खड़े हैं। साझा तस्वीर में कुछ लोग बिना मास्क लगाए भी गोदाम के बाहर नजर आ रहे हैं। 
 
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मध्यप्रदेश: पूर्व मंत्री की अंतिम विदाई में कोविड गाइडलाइंस की उड़ी धज्जियां, ना मास्क, ना सोशल डिस्टेंसिग का पालन

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का आज विदिशा के सिरोंज में अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों की भीड़ उमड़ गई, इस दौरान लॉकडाउन की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। ना किसी ने मास्क पहना और ना ही कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ। जबकि राज्य में कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। अब भी राज्य में कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को राज्य में 1078 नए केस मिले। बावजूद इसके लोग नियमों को मानने को तैयार नहीं हैं। 

राज्य सरकार की ओर से लॉकडाउन लागू है, हालांकि इस दौरान कुछ छूटें दी गई हैं, लेकिन अंतिम संस्कार, श्राद्ध कार्यक्रमों के लिए निश्चित संख्या तय की गई है।  अंतिम संस्कार में सिर्फ 10 लोगों के शामिल होने की इजाजत है, लेकिन पूर्व मंत्री के अंतिम संस्कार के दौरान नियमों का पालन नहीं हुआ। हजारों की संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंच गए। वह भी बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के। नेता के अंतिम संस्कार में लोगों ने कोविड गाइडलाइन्स की ही धज्जियां उड़ा दीं।

कोविड के कारण भाजपा नेता का निधन
गौरतलब है कि भाजपा नेता लक्ष्मीकांत शर्मा पिछले कुछ समय से कोरोना पीड़ित थे। 11 मई को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लंबे इलाज के बाद मंगलवार की शाम उनका निधन हो गया। निधन पर नेताओं ने शोक व्यक्त किया। 

व्यापम घोटाले में जाना पड़ा था जेल
पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सिरोंज लटेरी विधानसभा से तीन बार विधायक चुके गए थे।  1998, 2003 और 2008 में विधायक रहे, लेकिन 2013 के चुनाव में उन्हें यहां से हार का सामना करना पड़ा।  बता दें कि मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले के आरोप में पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को 2014 में जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, जांच में उनके खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। 
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शर्मनाक: खूबसूरत लड़की से कराते थे कॉल, फिर न्यूड वीडियो बना मांगते थे पैसे, कई राज्यों में बनाए शिकार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो खूबसूरत लड़की से कॉल कराकर युवाओं का न्यूड वीडियो बनाकर पैसे ऐंठने का धंधा कर रहा था। इतना ही नहीं एक साल में यह गिरोह मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों में लोगों को शिकार बनाया । अकेले मध्यप्रदेश में 60 लोगों को फंसाया गया है।  पुलिस ने हरियाणा से एक और राजस्थान से दो लोगों को गिरफ्तार किया है।  आरोपी व्हॉट्सएप कॉल पर न्यूड लड़की के वीडियो के साथ युवकों के वीडियो को जोड़ देते थे। इसके बाद, सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देक ब्लैकमेल करते थे। आरोपी वसीम को फिरोजपुर झिरका को  हरियाणा के मेवात से और पुरुषोत्तम व यादराम को राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार किया गया है।

पिछले दिनों भोपाल के एक युवक ने साइबर क्राइम में इसकी शिकायत की थी। उसने बताया कि फेसबुक के माध्यम से किसी महिला के नाम की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। रिक्वेस्ट स्वीकार करने पर महिला ने फेसबुक मैसेंजर पर बात की फिर कुछ दिन इसी पर बात होती रही। इसी बीच व्हॉट्सएप नंबर ले लिया।

पैसे की डिमांड करती थी महिला
उसके बाद उसने वीडियो कॉल किया। थोड़ी देर में एक सुंदर महिला न्यूड दिखने लगी। महिला ने उसे भी न्यूड होने को कहा। वह भी महिला की बात में आकर न्यूड हो गया और इसी दौरान उस कॉल की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। जिसके बाद इस रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी मिलने लगी। युवक का आरोप है कि महिला ने कहा कि अगर उसे पैसे नहीं देगा तो वह उसके रिश्तेदार, परिवार समेत सभी को यह वीडियो भेज देगा। 

युवक का आरोप है कि आरोपी महिला ने वीडियो को वायरल नहीं करने लिए बैंक खाते या मोबाइल वॉलेट में रुपये ट्रांसफर करने की बात कही। डर और लोकलाज की वजह से युवक ने काफी कुछ रुपये भी उसके खाते में भेजे। उसके बाद भी उसकी डिमांड बढ़ने लगी। जिससे तंग आकर युवक ने पुलिस से शिकायत की।  पुलिस ने जांच के बाद हरियाणा व राजस्थान में छापेमार कार्रवाई कर तीन आरोपियों को पकड़ा। 

फर्जी मोबाइल नंबर से आरोपी करते थे कॉल
आरोपी फर्जी मोबाइल नंबर से फेसबुक पर सुंदर महिलाओं की फोटो प्रोफाइल में लगाकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाते थे। ठगी के लिए लोगो को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दोस्ती करते थे। फेसबुक मैसेंजर पर बातों करते और फिर सामने वाले को विश्वास में लेकर उसका व्हॉट्सएप नंबर लेकर उससे रोमांटिक चैटिंग शुरू कर देते फिर उसे न्यूड महिलाओं की तस्वीर भेजकर उसे भी उकसाते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्स्पेट करने वालों से रात में मैसेंजर पर बात करते थे। उसके बाद उसका व्हॉट्सएप नंबर लेकर वीडियो कॉल करते थे। फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों से इस बारे में जल्द ही जानकारी जुटाकर इस मामले में जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। 
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साइबर क्राइम साइबर क्राइम

मध्यप्रदेश: इंदौर में तेजाब पिलाकर महिला को मौत के घाट उतारा, परिजनों ने ससुरालवालों पर लगाया आरोप

मध्यप्रदेश के इंदौर में एक विवाहित महिला को तेजाब पिलाकर मारने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बाणगंगा थाना क्षेत्र की महिला की मौत के बाद परिजनों ने ससुराल वालों पर उसकी हत्या का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने के बाद महिला की मौत हो गई तो परिजन शव लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को पति और ससुराल वालों ने तेजाब पिलाकर उसकी हत्या कर दी।

इंदौर जिले के देवली तराना के रहने वाले राजा परमार ने विवाहिता का शव लेकर रीगल चौराहा स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचे। यहां पर उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों से न्याय की गुहार की लगाई। परमार ने  बताया कि एंबुलेंस में उनकी बहन सोनाली का शव है जिसे ससुराल वालों और पति ने मार दिया। परिजनों का आरोप है कि महिला को ससुरालवालों ने एसिड पिलाकर मौत के घाट उतार दिया । 26 वर्षिय सोनाली को गुरुवार  दोपहर करीब 3 बजे घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती किया गया था। शुक्रवार दोपहर को डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतिका के परिजनों ने आरोप लगाया कि ससुराल वाले सोनाली से दहेज की मांग करते थे। इसके लिए वे आए दिन उसे प्रताड़ित करते थे। बीते दिनों पति ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी। परिजनों ने कहा कि सोनाली का एक बच्चा भी है। जिसे ससुराल वाले अपने पास रखना चाहते हैं। फिलहाल सीएसपी निहित उपाध्याय ने महिला की मौत के मामले की जांच खुद ही कर रहे हैं। 
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मध्यप्रदेश: 28 जून से श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन होंगे शुरू, ऑनलाइन बुकिंग के बाद मिलेगी अनुमति

भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए 28 जून से दर्शन शुरू होंगे। ऑनलाइन बुकिंग करवाने पर स्लॉट अनुसार दर्शन की अनुमति दी जाएगी। वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट (एक डोज लगवाने पर भी) या 24 से 48 घंटे पूर्व की कोविड रिपोर्ट दिखाने पर ही मंदिर परिसर में प्रवेश दिया जाएगा।

ऑनलाइन बुकिंग स्लॉट के अनुसार दर्शन की अनुमति दी जाएगी
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सभी देवस्थान दर्शन हेतु खुले रहेंगे। शीघ्र दर्शन के काउंटर खोले जाएगें, लेकिन शीघ्र दर्शन करने वाले दर्शनार्थियों को भी वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अथवा कोविड जांच रिपोर्ट दिखानी होगी। श्रद्धालुओं को 28 जून से प्रात: 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक सात स्लॉट में ऑनलाइन बुकिंग के बाद दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

उक्त निर्णय महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में गुरुवार को लिए गए। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं अध्यक्ष महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति आशीष सिंह द्वारा की गई।

बैठक में पुलिस अधीक्षक सत्येन्द्र कुमार शुक्ल, प्रबंध समिति के सदस्य विनीत गिरी महाराज, आशीष पुजारी, विजयशंकर शर्मा, दीपक मित्तल, महाकाल मंदिर प्रशासक  नरेन्द्र सूर्यवंशी, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, यूडीए सीईओ एसएस रावत, स्मार्ट सिटी सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान, प्रदीप गुरु मौजूद थे।

बैठक में निम्नानुसार अन्य प्रमुख निर्णय लिए गए :-
  •  श्रद्धालुओं को 28 जून से प्रात: 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक सात स्लॉट में ऑनलाइन बुकिंग के बाद दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
  •  मंदिर में सेल्फी लेने पर प्रतिबंध रहेगा।
  •  गर्भगृह एवं नन्दी हाल में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
  •  भस्म आरती एवं शयन आरती में  श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
  •  नि:शुल्क अन्नक्षेत्र को आधी क्षमता के साथ शुरू करने का अनुमोदन किया गया।
  •  इस बार श्रावण महोत्सव स्थगित रहेगा।
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श्रीराम मंदिर ट्रस्ट भूमि घोटाला: चंपत राय पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का तंज, मोदी उन्हें ट्रस्ट से जल्द हटाएं

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण ट्रस्ट पर लगे जमीन घोटाले के आरोप के बाद बढ़ी सियासत के साथ-साथ संत समाज भी नाराज है। द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने चंपत राय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को गैरजिम्मेदार बताते हुए हटाने की मांग की है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस दौरान अयोध्या में हो रहे मंदिर निर्माण में लगे ट्रस्ट के बहाने आरएसएस और भाजपा पर भी निशाना साधा। 

मंदिर ट्रस्ट से पहले चंपत राय को कोई नहीं जानता था- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर में परमहंसी गंगा अश्रम में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार ने मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट का निर्माण किया और उसमें बड़ी संख्या में भ्रष्टाचारियों को शामिल कर लिया गया। राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्ति से पहले तक चंपत राय को कोई नहीं जानता था, लेकिन उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। शंकराचार्य ने चंपत राय पर आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए जो राशि आई उससे महंगे दामों पर जमीन खरीद-बिक्री जा रही है। ऐसे में चंपत राय कह रहे हैं कि हम पर गांधी जी की हत्या का भी आरोप लगा। हम आरोपों की परवाह नहीं करते तो ऐसे गैर जिम्मेदार लोग किस तरह से ट्रस्ट में बैठे हुए हैं।

मोदी सरकार पर भी शंकराचार्य का निशाना
स्वरूपानंद सरस्वती ने बिना नाम लिए मोदी सरकार पर भी गोहत्या बंद नहीं कराने को लेकर तंज किया। शंकराचार्य ने कहा की गो हत्या बंदी के लिए जब इनकी संख्या संसद में 2 थी, तब लंबे समय तक इसके खिलाफ संघर्ष किया गया, जब संसद में इनकी संख्या 200 से ज्यादा हो गई तो यह गोहत्या बंद करने का नारा भूल गए।  

क्या है पूरा मामला
दरअसल, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन पर सवाल उठ रहे हैं। आप नेता संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता तेज नारायण पांडेय पवन ने ट्रस्ट पर जमीन खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। आरोप लगने के बाद कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की। 
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गिरी गाज: इंदौर में चोरी के शक में पुलिस ने सब्जीवाले को पीटा, गंदा पानी पिलाया, दो पुलिसकर्मी सस्पेंड

prayagraj news : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।
मध्यप्रदेश पुलिस की बर्बरता की खबरें आए दिन चर्चा में रहती हैं। प्रदेश की पुलिस पर आए दिन जांच के नाम पर टॉर्चर करने के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसा ही एक मामला इंदौर के चंदन नगर पुलिस स्टेशन से आया है। यहां के पुलिसवालों पर आरोप है कि चोरी के शक में एक सब्जी बेचने वाले व्यक्ति को पीटा, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। मामला बढ़ता देख दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पुलिसकर्मी एक कथित चोरी के आरोप की जांच कर रहे थे।

चंदन नगर थाना क्षेत्र में सब्जी बेचने वाले अजय गनवणे का आरोप है कि तीन चार महीने पुराने चोरी मामले में पुलिस ने उनसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया। इसी दौरान पुलिसवालों ने इतनी पिटाई की एक हफ्ता से ज्यादा बीतने के बाद भी लगी चोटें ठीक नहीं हुई। थाने में जब पीने के लिए पानी मांगा तो गंदा पानी दिया गया और दोनों हाथों को कुचल दिया गया।

पुलिस ने थाने में बुलाकर पीटा
गनवणे ने कहा कि इतना ही नहीं दोनों पुलिसवाले उन्हें 4 जून को सिरपुर तालाब के पास ले  जाकर प्लास्टिक की पाइपों और डंडों से बेदम पिटाई की। पुलिस की पिटाई से अभी तक चोट के निशान ठीक नहीं हुए हैं। इधर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान तक दोनों पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया है। 
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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर 80 दिन बाद 28 जून से खुलेगा, ऑनलाइन पंजीयन के साथ टेस्ट भी जरूरी

मध्य प्रदेश के उज्जैन में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आने के बाद प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर को 80 दिन बाद 28 जून से श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोलने का निर्णय लिया गया है। 

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के एक सदस्य ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के कारण मंदिर को इस साल नौ अप्रैल से जनता के लिए बंद कर दिया गया था। महामारी के चलते मंदिर को दूसरी बार बंद करना पड़ा था।

मंदिर के सहायक प्रशासक आर. के. तिवारी ने बताया कि उज्जैन जिला आपदा प्रबंधन समिति की शुक्रवार की बैठक में मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोलने का निर्णय लिया गया। मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा एक सप्ताह के अंदर इसकी रूपरेखा तय की जाएगी। मंदिर में प्रवेश करने वाले लोगों को कोविड-19 के दिशा निर्देशों के तहत सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

तत्काल मौके पर जांच की व्यवस्था होगी
उन्होंने बताया कि भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण के साथ श्रद्धालुओं को टीकाकरण प्रमाणपत्र समेत कोविड-19 की जांच रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें संक्रमण की पुष्टि नहीं हो। तिवारी ने बताया कि जो श्रद्धालु अपनी जांच रिपोर्ट नहीं ला सकते हैं उनकी तुरंत जांच करने के लिए यहां एक केन्द्र स्थापित किया जाएगा।

देश में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भी एक है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। उज्जैन में शुक्रवार को कोविड-19 के आठ नए मामले आए जिससे संक्रमितों की संख्या बढ़कर 18,843 हो गई है, जबकि 171 लोगों की मौत हो चुकी है।
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मध्यप्रदेश: कैबिनेट बैठक में सीएम शिवराज और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा आमने-सामने, जानें क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश में भाजपा की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है। इसी सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक में सियासी नजारा दिखने को मिला। कैबिनेट बैठक में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नर्मदा घाटी विकास योजना में बजट से ज्यादा छूट देने के प्रस्ताव का विरोध किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में जिस तरह नरोत्तम मिश्रा ने परियोजनाओं को सरकारी छूट दिए जाने पर आपत्ति जताई वह हैरान करने वाली घटना थी, पहली बार मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस मुद्दे पर आमने-सामने दिखे।
 
दरअसल, कोरोना के बाद पहली बार भोपाल में सभी मंत्री वल्लभ भवन में बैठक करने आए थे। कोरोना के चलते पिछले कई महीनों से वर्चुअल कैबिनेट बैठक हो रही थी। बैठक में नर्मदा घाटी विकास योजना के 8800 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट को बजट से ज्यादा छूट देने का प्रस्ताव आया । इस पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विरोध करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं में बांध नहीं बने हैं, लेकिन पाइप पहले ही डाले जा रहे हैं। यह समझ से परे है।

सरकार सीमा से ज्यादा छूट देने पर क्यों सोच रही
नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जब कोरोना संकट के दौरान सारे विभागों के बजट में कटौती की जा रही है तो इस विभाग को सरकार सीमा से ज्यादा छूट देने पर क्यों  सोच रही है। हालांकि बैठक में  कुछ दूसरे मंत्रियों ने कहा कि इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी जानी चाहिए, जिसपर मिश्रा ने कहा कि इस पर उनका विरोध दर्ज किया जाए। वह इसके पक्ष में कतई नहीं हैं। मिश्रा के तेवर देख सभी मंत्री हैरान थे। हालांकि कुछ मंत्री गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ थे, तो कुछ उनके खिलाफ में आवाज उठाए। 

बैठक में नरोत्तम मिश्रा के विरोध करने पर भी शिवराज सिंह चुपाचाप बैठे रहे
इतना ही नहीं गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस मामले पर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस से भी जवाब तलब किया। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चुपचाप बैठे रहे और मिश्रा बैठक से उठकर सीधे भाजपा दफ्तर पहुंचे और और संगठन मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखी। हालांकि बाद में ये सारे प्रस्ताव पारित कर दिए गए।

कांग्रेस सरकार गिराने में नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका
दरअसल, पिछले कुछ समय से शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा के बीच मनमुटाव चल रहा है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिराने के पीछे दतिया विधायक नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका बताई जा रही थी। नरोत्तम मिश्रा और उनके करीबियों क मानना है कि प्रदेश में भाजपा सरकार भले ही सत्ता में आ गई, लेकिन उनका हक नहीं मिला। यही वजह है कि कुछ दिनों पहले उनकी कैलाश विजयवर्गीय, प्रभात झा और प्रह्लाद पटेल से बैठकों की तस्वीरें सामने आई थी उन्होंने इसे सामान्य मेल मुलाकात कहा था।
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अनुच्छेद 370 : दिग्विजय के बयान से भाजपा सांसद खफा, बोले- मुंगेरीलाल जैसे सपने देखना बंद करें

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का अनुच्छेद 370 को लेकर दिए गए बयान का ऑडियो सामने आने के बाद से बवाल मचा हुआ है। इसे लेकर उन्हें और उनकी पार्टी को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने कहा है कि एक बार फिर साबित हो गया है कि कांग्रेस का हाथ पाकिस्तान, आतंकवादियों और अलगाववादियों के साथ है।

इधर, भाजपा नेता और आलोट संसदीय क्षेत्र उज्जैन से सांसद अनिल फिरोजिया ने भी दिग्विजय सिंह के इस बयान को लेकर जमकर खिंचाई की है। इसके लिए उन्होंने लगातार तीन ट्वीट किए। भाजपा नेता फिरोजिया ने अपने पहले ट्वीट में लिखा कि दिग्विजय सिंह जी अनुच्छेद 370 पर दिया गया आपका बयान देश से गद्दारी की श्रेणी में आता है। इस प्रकार का जयचंदी बयान देकर एक विकृत मानसिकता का परिचय दिया है।

उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा कि दिग्विजय सिंह जी हम जानते हैं कि आपके मन में धारा 370 हटने का दर्द है, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं, उनके साथ पूरा देश खड़ा है।

उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में लिखा कि दिग्विजय सिंह जी मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि कश्मीर भारत का मुकुट मणि है, आप 370 की बात करते हैं, थोड़ा सब्र रखिए पीओके भी मोदी जी के नेतृत्व में भारत में सम्मिलित अवश्य होगा। और हां एक सलाह है आपको कि मुंगेरीलाल जैसे सपने देखना बंद करिये।
 
दिग्विजय सिंह की गतिविधियों की एनआईए जांच करे : शर्मा
मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की गतिविधियों की एनआईए जांच की मांग की है।




 
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बड़ी खबर: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ में कोरोना वायरस के लक्षण, मेदांता में हुए भर्ती

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कमलनाथ पिछले दो दिनों से सर्दी-बुखार से पीड़ित हैं। उनमें बुखार के अलावा कोरोना संक्रमण के अन्य लक्षण भी दिखे हैं। कमलनाथ सुबह 10 बजे मेदांता अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचे, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने को कहा। 

इंदौर में लिफ्ट हादसे से बिगड़ी थी तबियत
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी महीने में इंदौर के एक निजी अस्पताल में लिफ्ट गिरने के हादसे में कमलनाथ बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उस सदमे की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल में ही ब्लड प्रेशर चेक कराया गया था। जहां ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था।




2018 में सीएम बने थे कमलनाथ
मध्यप्रदेश में साल 2018 में हुए विधासभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिली थी। कांग्रेस क वरिष्ठ नेता कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन पार्टी में बगावत के एक साल बाद ही कांग्रेस की सरकार प्रदेश में गिर गई। उसके बाद सीएम शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार की राज्य में वापसी हुई। 

हनीट्रैप मामले में कमलनाथ पर एसआईटी का शिकंजा
बता दें कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश में हनीट्रैप का मामला जोरों पर था। इसमें कमलनाथ भी कटघरे में आ गए थे। एसआईटी ने नोटिस जारी कर पेन ड्राइव की मांग की थी। दरअसल, कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार की महिला मित्र ने आत्महत्या कर ली थी, इस मामले में उमंग सिंघार पर केस दर्ज हुआ था। उसके बाद कमलनाथ ने उमंग सिंघार का बचाव करते हुए कहा था कि उनके पास भी भाजपा नेताओं के हनीट्रैप की पेन ड्राइव है। इस मामले पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कमलनाथ की निंदा की थी। इसी सिलसिले में एसआईटी ने उनपर शिकंजा कसा था।
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बड़ी राहत: मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, सरकार और एसोसिएशन के बीच इन मांगों पर बनी सहमति

मध्यप्रदेश में पिछले 6 दिनों से चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज खत्म हो गई। स्वास्थ्य मंत्री विश्वास सारंग से मुलाकात के बाद जूडा एसोसिएशन ने हड़ताल खत्म करने का एलान किया।  हड़ताल के खत्म होने के साथ ही अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों को बड़ी राहत मिली है।

जूनियर डॉक्टर्स अस्पतालों में काम पर लौट गए हैं। जूडा एसोसिएशन अध्यक्ष हरीश पाठक ने मीडिया से बताया कि सभी मांगों को लेकर सरकार और एसोसिएशन के बीच सहमति बनी। सरकार ने 17 फीसदी मानदेय बढ़ाने की मांग मान ली है, जबकि जूडा ने 24 फीसदी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने इसके लिए कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। जल्द से जल्द इस पर निर्णय ले लिया जाएगा। उसके बाद सभी डॉक्टर अस्पताल में काम शुरू कर दिए हैं। 

एमपी: जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म
मध्यप्रदेश में करीब 3000 जूनियर डॉक्टरों ने हफ्ते भर से जारी अपनी हड़ताल सोमवार को खत्म कर दी। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के साथ बैठक के बाद डॉक्टरों ने यह निर्णय लिया।

मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार ने वेतन में 17 फीसदी वृद्धि की मांग को स्वीकार कर लिया है। बता दें, राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर बीते सोमवार से वेतन वृद्धि और अपने और परिवारों लिए मुफ्त कोरोना इलाज की मांग पर हड़ताल पर थे। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेयूडीए) के अध्यक्ष अरविंद मीणा ने कहा कि बैठक के बाद हमने हड़ताल वापस ले ली।

31 मई से हड़ताल पर थे डॉक्टर
बता दें कि छह मांगों को लेकर जूडा का 31 मई से आंदोलन चल रहा था। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपपुर , रीवा और सागर में जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू की थी। पिछले सप्ताह एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर ने जूडा को 24 घंटे के भीतर हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का आदेश जारी किया था, लेकिन जूडा ने सामूहिक इस्तीफा देकर हड़ताल जारी रखी थी।

डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने का निर्देश
हरीश पाठक ने कहा 6 फीसदी वेतन वृद्धि को लेकर सीपीआई इंडेक्स की तर्ज पर हर साल बढ़ोतरी होगी। साथ ही ग्रामीण इलाकों में काम करने के लिए कमेटी तैयार की जाएगी। वहीं फाइनल ईयर स्टूडेंट का ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले बॉन्ड को कोविड बॉन्ड में बदला जाएगा। एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि जूनियर डॉक्टर कभी भी मरीजों का अहित नहीं चाहते हैं। मरीजों का बेहतर से बेहतर इलाज के लिए हमेशा लगे रहते हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में कोरोना वायरस और ब्लैक फंगस के बीच जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से सरकार नाराज थी। सरकार की ओर से रविवार को डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने का निर्देश जारी किया था। 
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