बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP
विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलवार को इन 4 राशिवालों की पलटेगी किस्मत, जेब में आएगा पैसा
Myjyotish

मंगलवार को इन 4 राशिवालों की पलटेगी किस्मत, जेब में आएगा पैसा

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Digital Edition

मध्यप्रदेश हनीट्रैप मामला: पूर्व सीएम कमलनाथ की मुश्किलें बढ़ीं, एसआईटी करेगी पूछताछ

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ की मुश्किलें बढ़ने वाली है।  हनीट्रैप की पेन ड्राइव मामले में एसआईटी ने नोटिस जारी किया है। पूर्व मंत्री उमंग सिंघार के बचाव में कमलनाथ ने कहा था कि मेरे पास हनीट्रैप की पेन ड्राइव है। मध्यप्रदेश में हनीट्रैप की जांच कर एसआईटी ने उन्हें 2 जून को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है।  एसआईटी ने कमलनाथ से पेन ड्राइव की भी मांग की है। साथ ही नोटिस में 2 जून को पूछताछ करने के लिए श्यामला हिल्स स्थित उनके आवास पर पहुंचने का जिक्र किया है।
 



क्या मचा सियासी बवाल?
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री उमंग सिंघार की महिला मित्र ने भोपाल में आत्महत्या कर ली थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उमंग सिंघार उससे कुछ दिन बाद शादी करने वाले थे। खुदकुशी के अगले दिन पुलिस ने उमंग सिंघार के ऊपर एफआईआर दर्ज की थी।  उसके बाद उमंग सिघार के बचाव में कांग्रेस उतर आई थी।  21 मई को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में पत्रकारवार्ता को संबोधित किया था। कमलनाथ ने इसी पर कहा था कि उनके पास भी  हनीट्रैप की पेन ड्राइव है। उनके कहने का मतलब था कि भाजपा नेताओं के हनीट्रैप वाला वीडियो उनके पास भी मौजूद है। इस पर भाजपा ने कमलनाथ को आड़े हाथ लिया था। उसी बयान को लेकर विवाद बढ़ा है।

21 मई को कमलनाथ ने कोरोना को लेकर केंद्र सरकार पर बोला था हमला
दरअसल, 21 मई को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में पत्रकारवार्ता को संबोधित किया था। इस दौरान कमलनाथ ने केंद्र की मोदी सरकार पर कोरोना को लेकर कई आरोप लगाए थे। कमलनाथ ने कहा कि दुनियाभर में देश की पहचान इंडियन कोरोना के नाम से बन गई है। सरकार अपनी छवि सुधारने में लगी हुई है और लोग यहां मर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार पर कोरोना से मरने वाले की संख्या छिपाने का भी आरोप लगाया था। जिसके अगले दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके बयानों पर सफाई दी थी। 
... और पढ़ें

वाह रे क्लर्क बाबू: घर पर छापेमारी में करोड़ों बरामद, कैश गिनने के लिए घर पर रखता था मशीन

मध्यप्रदेश में एक और बाबू करोड़पति निकला । उसके घर से 2 करोड़ की राशि , नोट गिनने की मशीन, बड़ी मात्रा में सोना-चांदी समेत बैंक खातें और जमीन के दस्तावेज मिले हैं। मामला राजधानी भोपाल का है।  क्लर्क किशोर मीणा को सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने तीन अधिकारियों के साथ गिरफ्तार किया था। चारों पर सिक्योरिटी एजेंसी से रिश्वत मांगने और लेने का आरोप था।  

सिक्योरिटी एजेंसी और अन्य लोगों ने FCI के बाबू किशोर मीणा के खिलाफ सीबीआई से शिकायत दर्ज की थी। उसी आधार पर सीबीआई ने शुक्रवार को सिक्योरिटी एजेंसी का 11 लाख रुपए का बिल पास करने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत लेते दो अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया और दो एक संभागीय मैनेजर और क्लर्क मीणा को बाद में गिरफ्तार किया ।

कैश गिनने वाली मशीन और जमीन के कागजात जब्त
शनिवार को सीबीआई ने किशोर मीणा और तीन अन्य अधिकारियों के आवास पर सुबह-सुबह दबिश दी। इसमें तीन अधिकारियों के घर पर सीबीआई टीम को कुछ भी हाथ नहीं लगा. लेकिन क्लर्क मीणा के छोला स्थित घर की तलाशी में  कैश, ज्वेलरी, बैंक खाते और जमीन के कागजत मिले हैं। 

किशोर मीणा के घर की तलाशी में एक डायरी, बड़ा लॉकर और नोट गिनने की मशीन भी मिली है। लॉकर में पैसे, सोना और चांदी रखी हुई थी। सीबीआई ने बताया कि एफसीआई के अधिकारी रिश्वत लेकर क्लर्क के घर पर रखते थे। सीबीआई डायरी में  अलग-अलग कंपनियों से फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के अधिकारियों ने जो घूस ली है उसकी डिटेल लिखी हुई है। फिलहाल कार्रवाई जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एफसीआई में गुड़गांव की एक सिक्योरिटी कंपनी कैप्टन कपूर एंड संस का टेंडर था, जिसका साल का 11 लाख रुपए का बिल बनता है। एफसीआई के संभागीय मैनेजर हर्ष हिनायना, अकाउंट मैनेजर अरुण श्रीवास्तव और सिक्योरिटी मैनेजर मोहन पराते 10 प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे, लेकिन कंपनी इतना पैसे देने को तैयार नहीं थी, कंपनी ने पुराने बिल का 50 हजार और नए बिल के 70 हजार रुपए देने की बात कही और डील पक्की हो गई। 
... और पढ़ें

मध्यप्रदेश: 7000 का इंजेक्शन 36 हजार में बेच रहा था मेडिकल संचालक, सीएसपी ने ग्राहक बनकर पकड़ा

मध्यप्रदेश के उज्जैन में सीएसपी (पुलिस अधिकारी) ने शुक्रवार को एक मेडिकल संचालक को ब्लैक फंगस का इंजेक्शन उसके खुदरा मूल्य से कई अधिक दामों पर बेचते हुए गिरफ्तार किया है। सीएसपी पल्लवी शुक्ला ग्राहक बनकर मेडिकल पर पहुंची। आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। मेडिकल संचालक की दुकान से 16 इंजेक्शन जब्त किए हैं।

पुलिस को लगातार ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की कालाबाजारी की शिकायतें मिल रही थीं। कालाबाजारी को रोकने के लिए एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल ने सीएसपी पल्लवी शुक्ला को ग्राहक बनाकर मुसद्दीपुरा स्थित मानव इंटरप्राइज मेडिकल पर भेजा। वहां पहुंचकर सीएसपी ने मेडिकल संचालक जुगलकिशोर से ब्लैक फंगस का रेमडेसिविर इंजेक्शन मांगा, तो देखा आरोपित 7000 का इंजेक्शन 36 हजार रुपये में बेच रहा था।

पुलिस ने जुगलकिशोर के खिलाफ धारा 269, 270, धारा 53, 57 आपदा प्रबंधन अधिनियम, धारा 3 महामारी अधिनियम, धारा 5/13 ड्रग कंट्रोल एक्ट के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया।
... और पढ़ें

गिरी गाज: इंदौर में चोरी के शक में पुलिस ने सब्जीवाले को पीटा, गंदा पानी पिलाया, दो पुलिसकर्मी सस्पेंड

मध्यप्रदेश पुलिस की बर्बरता की खबरें आए दिन चर्चा में रहती हैं। प्रदेश की पुलिस पर आए दिन जांच के नाम पर टॉर्चर करने के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसा ही एक मामला इंदौर के चंदन नगर पुलिस स्टेशन से आया है। यहां के पुलिसवालों पर आरोप है कि चोरी के शक में एक सब्जी बेचने वाले व्यक्ति को पीटा, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। मामला बढ़ता देख दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पुलिसकर्मी एक कथित चोरी के आरोप की जांच कर रहे थे।

चंदन नगर थाना क्षेत्र में सब्जी बेचने वाले अजय गनवणे का आरोप है कि तीन चार महीने पुराने चोरी मामले में पुलिस ने उनसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया। इसी दौरान पुलिसवालों ने इतनी पिटाई की एक हफ्ता से ज्यादा बीतने के बाद भी लगी चोटें ठीक नहीं हुई। थाने में जब पीने के लिए पानी मांगा तो गंदा पानी दिया गया और दोनों हाथों को कुचल दिया गया।

पुलिस ने थाने में बुलाकर पीटा
गनवणे ने कहा कि इतना ही नहीं दोनों पुलिसवाले उन्हें 4 जून को सिरपुर तालाब के पास ले  जाकर प्लास्टिक की पाइपों और डंडों से बेदम पिटाई की। पुलिस की पिटाई से अभी तक चोट के निशान ठीक नहीं हुए हैं। इधर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान तक दोनों पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया है। 
... और पढ़ें
मामले की जांच करती मध्यप्रदेश पुलिस मामले की जांच करती मध्यप्रदेश पुलिस

उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर 80 दिन बाद 28 जून से खुलेगा, ऑनलाइन पंजीयन के साथ टेस्ट भी जरूरी

मध्य प्रदेश के उज्जैन में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आने के बाद प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर को 80 दिन बाद 28 जून से श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोलने का निर्णय लिया गया है। 

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के एक सदस्य ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के कारण मंदिर को इस साल नौ अप्रैल से जनता के लिए बंद कर दिया गया था। महामारी के चलते मंदिर को दूसरी बार बंद करना पड़ा था।

मंदिर के सहायक प्रशासक आर. के. तिवारी ने बताया कि उज्जैन जिला आपदा प्रबंधन समिति की शुक्रवार की बैठक में मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोलने का निर्णय लिया गया। मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा एक सप्ताह के अंदर इसकी रूपरेखा तय की जाएगी। मंदिर में प्रवेश करने वाले लोगों को कोविड-19 के दिशा निर्देशों के तहत सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

तत्काल मौके पर जांच की व्यवस्था होगी
उन्होंने बताया कि भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण के साथ श्रद्धालुओं को टीकाकरण प्रमाणपत्र समेत कोविड-19 की जांच रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें संक्रमण की पुष्टि नहीं हो। तिवारी ने बताया कि जो श्रद्धालु अपनी जांच रिपोर्ट नहीं ला सकते हैं उनकी तुरंत जांच करने के लिए यहां एक केन्द्र स्थापित किया जाएगा।

देश में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भी एक है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। उज्जैन में शुक्रवार को कोविड-19 के आठ नए मामले आए जिससे संक्रमितों की संख्या बढ़कर 18,843 हो गई है, जबकि 171 लोगों की मौत हो चुकी है।
... और पढ़ें

मध्यप्रदेश: कैबिनेट बैठक में सीएम शिवराज और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा आमने-सामने, जानें क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश में भाजपा की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है। इसी सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक में सियासी नजारा दिखने को मिला। कैबिनेट बैठक में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नर्मदा घाटी विकास योजना में बजट से ज्यादा छूट देने के प्रस्ताव का विरोध किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में जिस तरह नरोत्तम मिश्रा ने परियोजनाओं को सरकारी छूट दिए जाने पर आपत्ति जताई वह हैरान करने वाली घटना थी, पहली बार मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस मुद्दे पर आमने-सामने दिखे।
 
दरअसल, कोरोना के बाद पहली बार भोपाल में सभी मंत्री वल्लभ भवन में बैठक करने आए थे। कोरोना के चलते पिछले कई महीनों से वर्चुअल कैबिनेट बैठक हो रही थी। बैठक में नर्मदा घाटी विकास योजना के 8800 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट को बजट से ज्यादा छूट देने का प्रस्ताव आया । इस पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विरोध करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं में बांध नहीं बने हैं, लेकिन पाइप पहले ही डाले जा रहे हैं। यह समझ से परे है।

सरकार सीमा से ज्यादा छूट देने पर क्यों सोच रही
नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जब कोरोना संकट के दौरान सारे विभागों के बजट में कटौती की जा रही है तो इस विभाग को सरकार सीमा से ज्यादा छूट देने पर क्यों  सोच रही है। हालांकि बैठक में  कुछ दूसरे मंत्रियों ने कहा कि इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी जानी चाहिए, जिसपर मिश्रा ने कहा कि इस पर उनका विरोध दर्ज किया जाए। वह इसके पक्ष में कतई नहीं हैं। मिश्रा के तेवर देख सभी मंत्री हैरान थे। हालांकि कुछ मंत्री गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ थे, तो कुछ उनके खिलाफ में आवाज उठाए। 

बैठक में नरोत्तम मिश्रा के विरोध करने पर भी शिवराज सिंह चुपाचाप बैठे रहे
इतना ही नहीं गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस मामले पर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस से भी जवाब तलब किया। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चुपचाप बैठे रहे और मिश्रा बैठक से उठकर सीधे भाजपा दफ्तर पहुंचे और और संगठन मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखी। हालांकि बाद में ये सारे प्रस्ताव पारित कर दिए गए।

कांग्रेस सरकार गिराने में नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका
दरअसल, पिछले कुछ समय से शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा के बीच मनमुटाव चल रहा है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिराने के पीछे दतिया विधायक नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका बताई जा रही थी। नरोत्तम मिश्रा और उनके करीबियों क मानना है कि प्रदेश में भाजपा सरकार भले ही सत्ता में आ गई, लेकिन उनका हक नहीं मिला। यही वजह है कि कुछ दिनों पहले उनकी कैलाश विजयवर्गीय, प्रभात झा और प्रह्लाद पटेल से बैठकों की तस्वीरें सामने आई थी उन्होंने इसे सामान्य मेल मुलाकात कहा था।
... और पढ़ें

बड़ी खबर: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ में कोरोना वायरस के लक्षण, मेदांता में हुए भर्ती

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कमलनाथ पिछले दो दिनों से सर्दी-बुखार से पीड़ित हैं। उनमें बुखार के अलावा कोरोना संक्रमण के अन्य लक्षण भी दिखे हैं। कमलनाथ सुबह 10 बजे मेदांता अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचे, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने को कहा। 

इंदौर में लिफ्ट हादसे से बिगड़ी थी तबियत
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी महीने में इंदौर के एक निजी अस्पताल में लिफ्ट गिरने के हादसे में कमलनाथ बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उस सदमे की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल में ही ब्लड प्रेशर चेक कराया गया था। जहां ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था।




2018 में सीएम बने थे कमलनाथ
मध्यप्रदेश में साल 2018 में हुए विधासभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिली थी। कांग्रेस क वरिष्ठ नेता कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन पार्टी में बगावत के एक साल बाद ही कांग्रेस की सरकार प्रदेश में गिर गई। उसके बाद सीएम शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार की राज्य में वापसी हुई। 

हनीट्रैप मामले में कमलनाथ पर एसआईटी का शिकंजा
बता दें कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश में हनीट्रैप का मामला जोरों पर था। इसमें कमलनाथ भी कटघरे में आ गए थे। एसआईटी ने नोटिस जारी कर पेन ड्राइव की मांग की थी। दरअसल, कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार की महिला मित्र ने आत्महत्या कर ली थी, इस मामले में उमंग सिंघार पर केस दर्ज हुआ था। उसके बाद कमलनाथ ने उमंग सिंघार का बचाव करते हुए कहा था कि उनके पास भी भाजपा नेताओं के हनीट्रैप की पेन ड्राइव है। इस मामले पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कमलनाथ की निंदा की थी। इसी सिलसिले में एसआईटी ने उनपर शिकंजा कसा था।
... और पढ़ें

बड़ी राहत: मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, सरकार और एसोसिएशन के बीच इन मांगों पर बनी सहमति

कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो)
मध्यप्रदेश में पिछले 6 दिनों से चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज खत्म हो गई। स्वास्थ्य मंत्री विश्वास सारंग से मुलाकात के बाद जूडा एसोसिएशन ने हड़ताल खत्म करने का एलान किया।  हड़ताल के खत्म होने के साथ ही अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों को बड़ी राहत मिली है।

जूनियर डॉक्टर्स अस्पतालों में काम पर लौट गए हैं। जूडा एसोसिएशन अध्यक्ष हरीश पाठक ने मीडिया से बताया कि सभी मांगों को लेकर सरकार और एसोसिएशन के बीच सहमति बनी। सरकार ने 17 फीसदी मानदेय बढ़ाने की मांग मान ली है, जबकि जूडा ने 24 फीसदी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने इसके लिए कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। जल्द से जल्द इस पर निर्णय ले लिया जाएगा। उसके बाद सभी डॉक्टर अस्पताल में काम शुरू कर दिए हैं। 

एमपी: जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म
मध्यप्रदेश में करीब 3000 जूनियर डॉक्टरों ने हफ्ते भर से जारी अपनी हड़ताल सोमवार को खत्म कर दी। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के साथ बैठक के बाद डॉक्टरों ने यह निर्णय लिया।

मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार ने वेतन में 17 फीसदी वृद्धि की मांग को स्वीकार कर लिया है। बता दें, राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर बीते सोमवार से वेतन वृद्धि और अपने और परिवारों लिए मुफ्त कोरोना इलाज की मांग पर हड़ताल पर थे। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेयूडीए) के अध्यक्ष अरविंद मीणा ने कहा कि बैठक के बाद हमने हड़ताल वापस ले ली।

31 मई से हड़ताल पर थे डॉक्टर
बता दें कि छह मांगों को लेकर जूडा का 31 मई से आंदोलन चल रहा था। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपपुर , रीवा और सागर में जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू की थी। पिछले सप्ताह एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर ने जूडा को 24 घंटे के भीतर हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का आदेश जारी किया था, लेकिन जूडा ने सामूहिक इस्तीफा देकर हड़ताल जारी रखी थी।

डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने का निर्देश
हरीश पाठक ने कहा 6 फीसदी वेतन वृद्धि को लेकर सीपीआई इंडेक्स की तर्ज पर हर साल बढ़ोतरी होगी। साथ ही ग्रामीण इलाकों में काम करने के लिए कमेटी तैयार की जाएगी। वहीं फाइनल ईयर स्टूडेंट का ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले बॉन्ड को कोविड बॉन्ड में बदला जाएगा। एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि जूनियर डॉक्टर कभी भी मरीजों का अहित नहीं चाहते हैं। मरीजों का बेहतर से बेहतर इलाज के लिए हमेशा लगे रहते हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में कोरोना वायरस और ब्लैक फंगस के बीच जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से सरकार नाराज थी। सरकार की ओर से रविवार को डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने का निर्देश जारी किया था। 
... और पढ़ें

शर्मनाक: बेटी पैदा होने से गुस्साए पति ने पत्नी और दो बेटियों को कुएं में धकेला, आठ साल की बच्ची की मौत

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में 42 वर्षीय एक व्यक्ति ने बेटा न होने पर कथित रूप से अपनी पत्नी एवं दो बेटियों को कुएं में धकेल दिया, जिससे आठ वर्षीय एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि महिला की आवाज सुनकर वहां से निकल रहे एक ग्रामीण ने महिला और उसकी एक बच्ची को बचा लिया। यह घटना छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर चंदला पुलिस थाना अंतर्गत हुई।

चंदला पुलिस थाना के विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह ने मीडिया को बताया कि मृत बच्ची की मां बिट्टी बाई यादव ने पुलिस के समक्ष बयान दिया है कि तीन माह पहले बेटी होने पर पति राजा भैया यादव उसे प्रताड़ित करता था और उसके साथ मारपीट करता था। इसी कारण वह अपनी बच्चियों के साथ एक माह पहले अपने मायके चली गई थी।

पति ने महिला और बच्चों पर पत्थर से किया हमला
उन्होंने बताया कि जानकारी के मुताबिक डढिया गांव का निवासी आरोपी राजा भैया यादव मोटारसाइकिल से पत्नी बिट्टी और दोनों बच्चियों को पन्ना जिले के लौलास गांव स्थित ससुराल से वापस लेकर आ रहा था। रास्ते में भी बेटी होने पर वह पत्नी को भला बुरा कह रहा था। पड़ोई गांव के पास सड़क से तीन-चार खेत दूर स्थित एक कुएं तक वह मोटरसाइकिल से पहुंचा और पत्नी और बच्चियों को कुएं में धकेल दिया।

पुलिस मामले की जांच में जुटी
अधिकारी उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस घटना में उसकी आठ वर्षीय बेटी की मौत हो गई, जबकि महिला, जो कि तैरना जानती थी, ने किसी तरह से तैर कर अपनी बच्ची को बचा लिया। हालांकि, जब वह कुएं से बाहर निकलने का प्रयास कर रही थी तब आरोपी ने उस पर पत्थर से हमला किया जिससे महिला के सिर पर चोट आई है। उन्होंने कहा कि महिला की आवाज सुनकर वहां से निकल रहे एक ग्रामीण ने महिला और उसकी एक बच्ची को कुएं से बाहर निकाला और दोनों को बचा लिया। सिंह ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी फरार है और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
... और पढ़ें

कोरोना पर भारी अंधविश्वास, राजगढ़ में जादुई पानी पीने उमड़ी भीड़

उज्जैन: 10 बच्चों में मिले कोरोना के नए सिंड्रोम के लक्षण, क्या तीसरी लहर का खतरा बढ़ा?

देश में कोरोना की दूसरी लहर काफी हद तक थम चुकी है। इस बीच मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में कुछ बच्चों में कोरोना के नए सिंड्रोम के लक्षण नजर आए। इन्हें तीसरी लहर का संकेत माना जा रहा है। दरअसल, उज्जैन के नागदा में ऐसे 10 मामले सामने आए, जो निजी लैब में जांच के दौरान मिले। मामले की जानकारी प्रशासन को मिली तो हड़कंप मच गया। 

यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, उज्जैन के नागदा में 10 बच्चे अचानक बीमार हो गए। उनकी जांच निजी लैब में कराई गई तो कोरोना के नए सिंड्रोम के लक्षण मिले। दरअसल, बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएसी) बीमारी पाई गई। एक निजी लैब में 10 बच्चों की सीआरपी वैल्यू ब्लड 20 से 137 एमजी तक मिली, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि यह वैल्यू महज 6 से 10 एमजी तक ही होनी चाहिए। अहम बात यह है कि निजी और सरकारी चिकित्सकों ने इन बच्चों को अलग-अलग शहरों में रैफर कर दिया। साथ ही, इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी तक नहीं दी। 

विशेषज्ञों ने कही यह बात
नागदा के कोविड प्रभारी डॉ. संजीव कुमरावत का कहना है कि देश के बाहर ऐसे कई मामले मिले चुके हैं, जिनकी स्टडी हमने की है। जिन बच्चों को कोरोना हो चुका या जो बच्चे कोरोना संक्रमित के संपर्क में आ गए, उनमें करीब एक महीने बाद मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण मिलते हैं। इसमें सीआरपी वैल्यू और ईएसआर वैल्यू बढ़ने लगती है। ऐसे बच्चों की एलडीएच सहित अन्य जांचें की जाती हैं, जिससे पता चल सके कि उन्हें एमआईएससी है या नहीं। 

27 अप्रैल को उज्जैन में आया था पीक
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, उज्जैन जिले में लगभग 27 अप्रैल को कोरोना की दूसरी लहर का पीक आया था। उस दौरान लगभग हर दूसरे-तीसरे घर में संक्रमित मरीज मिले थे। इसके आधार पर ही एक माह बीत चुका है, तभी एमआईएससी की शुरुआत जिले में हुई।

बच्चों में दिखे ऐसे लक्षण
  • बुखार आना
  • आंखें आना
  • शरीर पर दाने आना
  • जीभ और होंठ लाल होना
  • दस्त लगना
  • ब्लड प्रेशर कम होना
  • गुमसुम या सुस्त रहना
... और पढ़ें

उज्जैन: महाकाल मंदिर में मिले 2100 साल पुराने अवशेष, जांच जारी

उज्जैन महाकाल मंदिर के परिसर में खुदाई के दौरान करीब 2100 साल पुराने अवशेष मिले हैं। इस बात पता जब संस्कृति मंत्रालय को चला तो पुरातत्व की टीम भोपाल से उज्जैन पहुंची और वहां गहराई से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि मंदिर में मिले अवशेषों को जानकारों के निगरानी चेक करने के बाद एक रिपोर्ट बनाकर संस्कृति मंत्रालय को सौंपा जाएगा।

पुरातत्व विभाग की टीम का नेतृत्व कर रहे अधिकारी डॉ रमेश यादव ने बताया कि 11वीं और 12वीं शताब्दी में बने मंदिर के अवशेष वर्तमान मंदिर परिसर के नीचे दबे हुए हैं, जो की उत्तर वाले भाग में है। उन्होंने कहा कि दक्षिण की ओर 4 मीटर नीचे एक दिवार मिली है जो करीब करीब 2100 साल पुरानी हो सकती है। 

ऐसा पहली बार नहीं जब महाकाल मंदिर में पुराने अवशेष मिले हैं। पिछले साल दिसंबर 2020 में भी हजारों साल पुराने शिलालेख मिले थे। इसके बाद लगातार यहां खुदाई का काम किया जा रहा है। इसके बाद खुदाई का कार्य रोक दिया गया। यहां खुदाई के दौरान सोमवार को माता की प्रतिमा मिली।

संस्कृति मंत्रालय के आदेश पर भोपाल संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के चार सदस्य डॉ. रमेश यादव (पुरातत्वीय अधिकारी), डॉ. धुवेंद्र सिंह जोधा (शोध सहायक), योगेश पाल (पर्यवेक्षक) और डॉ. राजेश कुमार ने बुधवार को मंदिर में निरीक्षण किया। 

वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स भी मिल सकते हैं
डॉ. रमेश यादव ने दावा किया कि खुदाई कार्य को जानकारों की निगरानी में करने की जरुरत है। यहां बड़े अवशेष भी मिल सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट में मंत्रालय को पेश करेंगे। आने वाले दिनों में कार्य की रिकॉर्डिंग कराई जाएगी।

इधर, भोपाल के रहने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिटायर्ड अधीक्षक डॉ. नारायण व्यास ने भी माना कि महाकाल वन की खुदाई की जानी चाहिए। अभी जो साक्ष्य मिले, वो ईसा पूर्व हो सकते हैं। साइंटिफिक पद्धति से स्टडी करवाने की जरुरत है। महाकाल मंदिर में वर्ल्ड हेरिटेड मॉन्यूमेंट्स भी मिल सकते हैं।
... और पढ़ें

मध्यप्रदेश: इंदौर के अस्पताल में 20 दिन के भीतर ब्लैक फंगस के 32 मरीजों ने तोड़ा दम

मध्यप्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) कहर बनकर टूट रहा है। इंदौर जिले में ब्लैक फंगस के ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) में पिछले 20 दिनों के भीतर इस बीमारी के 32 मरीजों की मौत हो गई। एमवायएच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। एमवायएच, राज्य में ब्लैक फंगस का इलाज करने वाला सबसे व्यस्त अस्पताल है जहां इंदौर के अलावा अन्य जिलों के मरीज भी भर्ती हैं।

एमवायएच के अधीक्षक प्रमेंद्र ठाकुर ने बताया, "हमारे अस्पताल में ब्लैक फंगस का पहला मरीज 13 मई को भर्ती हुआ था और अब तक इसके कुल 439 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 84 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 32 मरीजों की मौत हो चुकी।" अधीक्षक ठाकुर ने बताया कि एमवायएच में ब्लैक फंगस के मरीजों की वर्तमान मृत्यु दर 7.29 प्रतिशत है। हालांकि, यह दर राज्य के अन्य अस्पतालों के मुकाबले कम है।

अस्पताल में 200 मरीजों की सर्जरी
एमवायएच अधीक्षक ने बताया, "हम ब्लैक फंगस के मरीजों की जान बचाने के लिए पिछले 20 दिनों में 200 से ज्यादा लोगों की सर्जरी कर चुके हैं।" एमवायएच में फिलहाल ब्लैक फंगस के 323 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 14 लोग कोविड-19 से संक्रमित हैं, जबकि 301 व्यक्तियों में इस महामारी से उबरने के बाद ब्लैक फंगस की समस्या उत्पन्न हुई है। ब्लैक फंगस के आठ अन्य मरीजों को कोविड-19 होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

राज्य में इंदौर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला
गौरतलब है कि इंदौर, मध्य प्रदेश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35 लाख की आबादी वाले जिले में 24 मार्च 2020 से लेकर अब तक महामारी के कुल 1,50,516 मरीज मिले हैं। इनमें से 1,347 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई।

सूबे में पॉजिटिविटी रेट 5 फीसदी से कम
मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में पॉजिटिविटी रेट 5 फीसदी से नीचे आ गया है। सूबे में एक्टिव केसों की संख्या 20,000 से भी कम हो गई है। राज्य में अब तक कोरोना के 7.80 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 7.5 लाख से ज्यादा लोग स्वस्थ हो चुके हैं। हालांकि 8,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राज्य में अब तक 1,11,67,304 वैक्सीन डोज भी लग चुकी हैं।
... और पढ़ें
Election
  • Downloads

Follow Us