क्या तीसरी कोशिश में उड़ पाएगी टाटा?

अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 20 Sep 2013 04:58 PM IST
will tata able to fly in third attempt
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जब टाटा ग्रुप ने ऐलान किया कि वह सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर देश में फुल-सर्विस एयरलाइन की उड़ान भरना चाहती है, तो कारोबारी जगत का हैरान होना स्वाभाविक था।
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दरअसल, टाटा की तरफ से यह घोषणा ऐसे वक्त आई है, जब मलेशियाई कंपनी एयर एशिया के साथ उसका संयुक्त उपक्रम (जेवी) अभी तक रनवे पर भी नहीं आया है।

टाटा संस ने साफ कर दिया है कि वह इस कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी रखेगी, जबकि शेष हिस्सा सिंगापुर एयरलाइंस के पास रहेगा।

पहले नाकाम रही टाटा
दिलचस्प है कि देश में नमक से लेकर नैनो कार तक बनाने वाली यह कंपनी आसमान में कभी खास कामयाब नहीं रही है। यह उसकी तीसरी कोशिश है।

यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि तमाम कारोबारी सेगमेंट में मजबूती से पांव गढ़ाए बैठी यह कंपनी क्या इस बार आसमान में भी अपना परचम लहरा सकेगी।

इतिहास खंगाला जाए, तो पता चलता है कि 1932 में जेआरडी टाटा ने टाटा एयरलाइंस की शुरुआत की थी, जिसका नाम बदलकर 1946 में एयर इंडिया होगा। इसके बाद सात साल बाद इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।


इसके कई साल बाद 1995 में टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस ने फुल-सर्विस एयरलाइन के लिए एफआईपीबी के पास आवेदन किया, जिसे एक साल बाद मंजूरी मिली।

नियम बदले, बिगड़ा खेल
हालांकि, इस उपक्रम ने कभी काम करना शुरू नहीं किया, क्योंकि 1997 में नागर विमानन नीति में बदलाव हो गया, जिसके कारण विदेशी विमान कंपनियों के घरेलू कंपनियों में हिस्सा खरीदने पर रोक लगा दी गई।

2000 में टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस ने एक बार फिर मिलकर एयर इंडिया के विनिवेश में 40 फीसदी हिस्से के लिए बोली लगाई, लेकिन बाद में इससे हाथ पीछे खींच लिया।

13 साल बाद अचानक टाटा एक बार फिर आक्रामक हुई और उसकी कोशिश किसी न किसी तरह नागर विमानन क्षेत्र में कूदने की है।

हाल में उसने एयर एशिया के साथ मिलकर जेवी बनाया था, हालांकि उसे अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। अभी यह भी नहीं कहा जा सकता कि तीन कंपनियों की हिस्सेदारी से बनने वाली एयर एशिया इंडिया कब तक रनवे पर आएगी।

इसके तुरंत बाद सिंगापुर एयरलाइंस से हाथ मिलाकर उसने साफ कर दिया है कि वह इस क्षेत्र को लेकर गंभीर है। दोनों कंपनियां जेवी बनाने पर 10 करोड़ डॉलर खर्च करेंगी और कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में होगा।

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