आईआईटीआर में जांच से होगी इंटरनेशनल ब्रांडिंग

अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 27 Jun 2014 12:13 PM IST
International branding investigation will iitr
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) इंडस्ट्री के लिए अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्वॉलिटी ब्रांडिंग का काम करेगा। इसके लिए आईआईटीआर को गुड लैबोरेट्री प्रेक्टिस (जीएलपी) सर्टिफि केट मिला है।
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अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए यह सर्टिफिकेट संस्थान को राष्ट्रीय जीएलपी अनुपालन निगरानी प्राधिकरण (एनजीसीएमए) ने दिया है।

गुरुवार को जीएलपी सर्टिफिकेट मिलने की जानकार्री आईआईटीआर के निदेशक डॉ. केसी गुप्ता ने मीडिया को प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से संस्थान इसके लिए प्रयास कर रहा था।


इसके लिए एनजीसीएमए के मानकों को लैबोरेट्री में पूरा किया गया। वहीं, दो बार एनजीसीएमए की टीम ने निरीक्षण भी किया। इस दौरान जीएलपी समकक्ष मानकों पर संस्थान के वैज्ञानिकों ने 44 स्टडी भी पूरी की।

जीएलपी मिलने से जहां आईआईटीआर अंतरराष्ट्रीय लैबोरेटरीज के बराबर खड़ा हो गया है। वहीं, इसका फायदा विदेशों को निर्यात करने वाली कंपनियों को मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी आईआईटीआर से अपने उत्पादों की टॉक्सिसिटी की जांच करा सकेंगीं। उन्होंने बताया कि अभी कनाड़ा और दक्षिण अफ्रीका से डिमांड हैं।

संस्थान के वष्ठि वैज्ञानिक डॉ. एबी पंत ने बताया कि जीएलपी अंतरराष्ट्रीय ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनोमिक कॉर्पोरेशन एंड डवलपमेंट (ओईसीडी) की पहल है। ओईसीडी ने ही अंतरराष्ट्रीय मानकों को तय कर जीएलपी की गाइडलाइंस तय कीं।

इससे अलग-अलग देशों के मानकों को पूरा करने की मुसीबत खत्म हुई। इस समय ओईसीडी के 85 सदस्य देश हैं, जहां यह दिशा निर्देश माने जाते हैं। इसमें अमेरिकी और यूरोपियन देश शामिल हैं।

भारत में एनजीसीएमए जीएलपी देने और निगरानी करने के लिए सरकारी संस्था है। इसकी स्थापना 2002 में की गई थी। आईआईटीआर वैश्विक दर्जा पाने के साथ अब जहां काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की अकेली जीएलपी सर्टिफिकेट पाने वाली और देश की दूसरी लैब है।

वहीं, केवल नाइपर मोहाली को जीएलपी का दर्जा मिला हुआ है। यह सर्टिफिकेट तीन साल यानी चार जून, 2017 तक के लिए वैध होगा। पांच जून को आईआईटीआर को जीएलपी के लिए चुना गया था।

आईआईटीआर को यह सर्टिफिकेट टॉक्सिसिटी और उत्परिवर्तजनियता स्टडी के लिए मिला है। डॉ. केसी गुप्ता ने बताया कि जीएलपी मिलने का उन सभी इंडस्ट्री को फायदा होगा, जो केमिकल पर आधारित हैं।

इनमें सबसे ज्यादा फायदा जहां फार्मा इंडस्ट्री को होगा। वहीं, कॉस्मेटिक, पैट्रोकैमिकल उत्पाद, ऑइल इंडस्ट्री, फ ूड प्रोडक्ट्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

भारतीय आम पर यूरोप में लगे प्रतिबंध जैसी समस्याओं को भी जांच करने के बाद दूर कराया जा सकेगा। यह जांच कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता के साथ कराई जा सकेगी।

आईआईटीआर के सर्टिफिकेट से इंडस्ट्री की ब्रांडिंग में भी मदद मिलेगी। सबसे ज्यादा इसका फायदा छोटे-मझले उद्यमों को होगा। निदेशक डॉ. गुप्ता ने बताया कि नदियों की टॉक्सिसिटी को लेकर वे पहले ही काम कर रहे हैं।

गंगा नदी की सफाई के लिए भी केंद्र सरकार को जरूरी मदद उपलब्ध कराने पर सहमति बनाई है। इसके लिए सरकार से संस्थान के वैज्ञानिक संपर्क करेंगे।

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