पोर्नोग्राफी जैसी है चेतन भगत की भाषाः हाईकोर्ट

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 03 May 2013 06:55 PM IST
language of chetan bhagat is like pornography: highcourt
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गुजरात हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई में जाने-माने लेखक चेतन भगत की किताबों की भाषा को 'पोर्नोग्राफी' जैसी कहा है।
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हाईकोर्ट ने यह बात भगत की किताब 'थ्री मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' के संदर्भ में कही है।

मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य ने हिंदी फिल्म 'काइ पो चे' में दिखाए गए दंगे के दृश्यों के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।


फरवरी में रिलीज हुई इस फिल्म को चेतन भगत की 'द थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ' किताब पर आधारित माना जा रहा है।

न्यायाधीश ने किताब में लिखे दंगे के अंशों को पढ़ते हुए टिपण्णी की, 'इसकी भाषा सभ्य नहीं है और पोर्नोग्राफी जैसी है। कोई भी सभ्य लेखक ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता।'

वहीं, वरिष्ठ लेखक जगदीश्वर चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि समस्या यह है कि लेखक लिखे तो किस भाष में लिखे? कोई भाषा संघ को पसंद नहीं, कोई भाषा साहित्य के मठाधीशों को पसंद नहीं।

उन्होंने लिखा है कि लेखक अपनी भाषा तय करने से पहले किसी से पता करने नहीं जाएगा कि मैं इस भाषा में लिखूँ या न लिखूँ?'

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में फिल्म के खिलाफ एडवोकेट भौमिक भट्ट ने जनहित याचिका दाखिल की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 'काइ पो चे' फिल्म के अंदर राज्य में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों को जिस तरह से दिखाया गया है उससे हिंदू समुदाय का अपमान हुआ है।

याचिकाकर्ता ने इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से मिली मंजूरी रद्द करने की मांग की है।

मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति जे पी पारदीवाला 20 जून को इस याचिका पर सुनवाई करेंगे।

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