देखिए पीपल का एक पेड़, जो अपने आप अचानक गिर जाता है, सूख जाता है और फिर से पनप जाता है

जीतेंद्र जीत, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 09 Jul 2019 04:49 PM IST
पीपल का अनोखा पेड़
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हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे अनोखे पेड़ के बारे में जो अपने आप अचानक गिर जाता है, सूख जाता है और फिर हरा-भरा होकर उग जाता है। एग्रीकल्चर हिसार यूनिवर्सिटी में वानिकी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरएस ढिल्लो कहते हैं कि यह पेड़ किसी जेनेटिक कारण से ऐसा हो सकता है, लेकिन यह भी जांच का विषय है। पेड़ की जांच की जाएगी और जांच के बाद ही इसके बारे में विस्तार से बताएंगे। देखिए तस्वीरें...
पीपल का अनोखा पेड़
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हरियाणा के हिसार में गांव बीड़ बबरान में महाभारतकालीन पीपल का वृक्ष करीब चार साल पहले तड़के तीन बजे अचानक जड़ सहित जमीन पर गिर गया। मान्यता के अनुसार यह वही पेड़ था, जो बर्बरीक और श्रीकृष्ण के संवाद से जुड़ा था, जिसमें बर्बरीक ने एक ही तीर से पेड़ के सभी पत्तों को छेद दिया था। आज भी इस पेड़ के पत्तों में छेद होता है। इस वृक्ष के अचानक गिरने से पुजारी पं. विनोद शर्मा व मंदिर में रहने वाले अन्य भक्त दौड़ कर आए। पुजारी के अनुसार, वे पेड़ को गिरा देखकर हैरान थे, क्योंकि उस समय न आंधी थी न तूफान। यह भारी भरकम पेड़ गिरने के बाद भी 7-8 महीने तक हरा-भरा रहा, लेकिन उसके बाद सूखने लगा।
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पीपल का अनोखा पेड़
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पुजारी ने बताया कि अपने अंदर ऐतिहासिकता और पत्तों में छेद होने की विशेषता समेटे इस पेड़ के गिरने से हर कोई चिंतित था। इसलिए उसको खड़ा करने के उपाय किए जाने लगे। पुरानी वस्तुओं का रख-रखाव करने वाली विशेष टीम अमृतसर से आई, लेकिन प्रयास असफल रहे। फिर हिसार कैंट के एक फौजी अफसर सूरजभान अरोड़ा ने 40-50 हजार रुपये खर्च किए और वन विभाग के अधिकारी व इंजीनियर आदि बुलाकर पेड़ को उसी स्थान पर खड़ा किया गया। हालांकि उसका कुछ हिस्सा काटना पड़ा, लेकिन चिंता थी कि पेड़ फिर से फुटाव करेगा या नहीं। चिंता दूर हुई, जब छह माह बाद (मार्च 2019 में) उसमें फुटाव होना शुरू हो गया।
पेड़ देखने आए श्रद्धालु
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पुजारी के अनुसार, फुटाव तो हो गया था, लेकिन चिंता थी कि पेड़ जिस बात के लिए मशहूर था, क्या वो अब भी होगा। क्या अब भी उसके पत्तों में छेद होगा या नहीं। लेकिन एक करिश्मा हुआ और फुटाव के कुछ सप्ताह बाद ही पत्तों के बीच छेद दिखाई देने लगे। खास बात यह है कि जहां यह ऐतिहासिक पेड़ है, उससे मात्र 10 फीट की दूरी पर एक और पीपल का पेड़ है, लेकिन इस पेड़ के पत्ते बिलकुल साफ आते हैं और उनमें कोई छेद भी नहीं होता। इसके विपरीत पेड़ से करीब 20 मीटर दूर मंदिर परिसर में पुराना कुआं है, जिसके पास मुख्य पेड़ की जड़ें पहुंची हुई थीं और उन जड़ों में से दीवार से फुटाव हो गया, जिसमें से एक टहनी बाहर निकल आई। करिश्माई बात ये है कि उन टहनियों पर जो पत्ते आए, उनमें भी छेद हैं।
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मंदिर के पुजारी
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विज्ञान की दुनिया में यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इस पीपल के पेड़ के पत्तों में आज भी छेद रहता है। पेड़ पर जब नए पत्ते आते हैं तो वह साबुत होते हैं, लेकिन ज्यों-ज्यों बड़े होते हैं तो उनमें छेद हो जाता है। महाभारत की कथा के अनुसार, वीर बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच का पुत्र था। वह सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर था और उसे यह वरदान था कि वह एक ही बाण से सामने खड़ी सेना के जवानों को मौत के घाट उतार सकता था। श्रीकृष्ण को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने इसी स्थान (बीड़ बर्बरीक) पर उसे रोक लिया। श्रीकृष्ण ने वीर बर्बरीक को पीपल के पेड़ के सभी पत्ते एक ही तीर से छेदने को कहा। वीर बर्बरीक ने तीर चलाया तो एक-एक करके तीर पत्तों को छेदता चला गया और श्रीकृष्ण के पैर के पास आकर रुक गया। इस पर बर्बरीक ने कहा कि प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा हुआ है। कृपया पैर हटा लें, क्योंकि मैंने तीर को पत्तों को छेदने की आज्ञा दी है, आपके पैर को नहीं। श्रीकृष्ण ने पैर हटाया तो तीर ने उस आखिरी पत्ते को भी छेद दिया था।
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