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Lakshya Sen: तीन साल की उम्र में रिमोट कार छोड़ पकड़ा था रैकेट, ऐसी है लक्ष्य के 'गोल्डन ब्वाय' बनने की कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 09 Aug 2022 01:00 PM IST
लक्ष्य सेन
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‘ऊंचे ख्वाबों के लिए दिल की गहराई से काम करना पड़ता है, यूं ही नहीं मिलती कामयाबी किसी को, मेहनत की आग में दिन-रात जलना पड़ता है...।’ लक्ष्य की भी कहनी कुछ ऐसी ही है। बचपन में पिता व कोच डीके सेन चार बजे स्टेडियम निकल जाते थे, जबकि मां शिक्षिका थीं। ऐसे में तीन साल की उम्र में पिता ने लक्ष्य को एकेडमी ले जाना शुरू किया। वहां एक बार जो लक्ष्य ने रैकेट पकड़ा, इसके बाद बचपन के खेलकूद सब भूल गया। 

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डीके सेन के पारिवारिक मित्र और उनसे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले गोकुल सिंह मेहता ने लक्ष्य के बचपन की कुछ यादें अमर उजाला से साझा की। उन्होंने बताया कि बचपन में लक्ष्य को रिमोट कार बहुत पसंद थी। मम्मी के सामने जब भी वह होता तो रिमोट वाली कार चलाता था, लेकिन पापा डीके सेन के घर आने की आहट होते ही उसे छिपा देता था।

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धीरे-धीरे स्टेडियम में जब मेहनत ज्यादा पड़ने लगी तो उसने बचपन के खेल और अपनी प्यारी रिमोट कार भी छोड़ दी। लेकिन पिछले दिनों वह जब इंडोनेशिया से लौटा तो रिमोट वाली कार लेकर आया। डीके सेन से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कामयाबी के लिए लक्ष्य ने जो बचपन नहीं जिया है वह अब जीने की कोशिश कर रहा है। 
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जूनियर इंटरनेशनल खिलाड़ी शिवम मेहता ने बताया कि लक्ष्य भइया मस्तीखोर भी हैं। बंगलूरू में प्रकाश पादुकोण एकेडमी में मैं भी प्रैक्टिस करता हूं। एक दिन जब मैं पहुंचा तो उन्होंने सख्ती से गेम के बारे में पूछने लगे। मैं सहम गया तो हंसते हुए बोले, बिंदास रह और खेल पर ध्यान दे। किसी ने डरना नहीं है और खुलकर खेल। हमेशा मेरे खेल को बेहतर करने की सलाह देते रहते हैं। एकेडमी से रात 10 बजे के बाद बाहर जाने की मनाही है, लेकिन एक रात हम दोनों छिपकर बाहर निकले और थोड़ी देर में ही लौटा आए। किसी को कुछ पता नहीं चला, लेकिन मजा बहुत आया। 
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लक्ष्य के भाई और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी चिराग सेन भी अपने भाई की कामयाबी से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि भाई की कामयाबी पर फक्र होता है। हम दोनों को इस मुकाम पर पहुंचाने के लिए मम्मी और पापा ने काफी मेहनत की है। चिराग का कहना है कि लक्ष्य का अभी बेहतर आना बाकी है। यह तो उसकी अभी शुरुआत है।
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लक्ष्य सेन
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लक्ष्य सेन के बारे में जब फोन पर निर्मला सेन से बात की तो उन्होंने बताया कि लक्ष्य को बचपन से भिंडी की सब्जी और मेरे हाथ का बना नॉनवेज बेहद पसंद है। इसके अलावा घर का बना दाल-चावल भी बड़े चाव से खाता है। जंक फूड उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं है। 
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